रोहिंग्या को हर सुविधा देने वाला राज्य पाकिस्तानी हिन्दुओं के बच्चों को नहीं भर्ती कर रहा स्कूलों में

इस राज्य में देश की आन्तरिक तथा बाहरी सुरक्षा के लिए खतरा रोहिंग्या आक्रान्ताओं की पैरोकारी की जाती है, इस राज्य में देश को बुरी तरह से संक्रमित कर रहे मजहबी उन्मादी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पैरोकारी की जाती है. रोहिंग्या आक्रान्ता इस राज्य में नस इरफ रह रहे हैं बल्कि तमाम सुविधाओं का लाभ भी ले रहे हैं लेकिन सेक्यूलरिज्म देखिये कि इसी राज्य में आतंकी मुल्क पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आये हिन्दुओं के बच्चों को स्कूलों में दाखिला तक नहीं मिल रहा है.

हम बात कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल शासित दिल्ली की. वो केजरीवाल जी जो मानवाधिकारों तथा इंसानियत के आधार पर रोहिंग्याओं के हमदर्द बनते हैं लेकिन उनकी सत्ता वाले राज्य दिल्ली में पाकिस्तान से भारत आये हिंदू शरणार्थियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. दक्षिणी दिल्ली के एक स्कूल ने तीन पाकिस्तानी भाई-बहनों को स्कूल से यह कहकर निकाल दिया है कि उनकी उम्र नवीं कक्षा में पढ़ने के लिहाज से बहुत ज्यादा है. अब बच्चों के माता-पिता उनका एडमिशन कराने के लिए कभी स्कूल तो कभी स्थानीय विधायक के घर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें दाखिला नहीं मिल पाया है.

जानकारी के मुताबिक़, बच्चों के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उनका नामांकन कराने की अपील की है लेकिन अभी तक उन्हें न्याय नहीं मिला है. दरअसल, पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न बहुत ज्यादा बढ़ जाने के बाद संजिनी बाई (16 वर्ष), रवि कुमार (17 वर्ष) और मूना कुमारी (18 वर्ष) इसी साल मई 2019 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए थे. वहां से आने के बाद जुलाई महीने में उन्होंने दिल्ली के शिक्षा विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. संजिनी और मूना कुमार के पास पाकिस्तान के एक स्कूल से आठवीं कक्षा में पास करने का प्रमाण पत्र भी है, जबकि रवि कुमार के पास भी दसवीं की परीक्षा देने का प्रमाण पत्र है.

जानकारी के मुताबिक़, तीनों ही बच्चों ने नवीं कक्षा में पढ़ने के लिए अनुमति मांगी थी. रजिस्ट्रेशन के बाद बच्चों को स्कूल में बैठने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन गत 14 सितंबर को स्कूल ने उन्हें यह कहकर निकाल दिया कि उनकी उम्र नवीं कक्षा में पढ़ने के लिहाज से बहुत ज्यादा है, जिसके बाद से ही बच्चों का संघर्ष जारी है. बच्चों के परिवारवालों  ने बताया कि उनके कई प्रयास के बाद भी स्कूल बच्चों का दाखिला लेने को तैयार नहीं है.

बच्चों के परिजनों का कहना है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल जी को भी पत्र लिखा है लेकिन उन्हें अभी तक जवाब नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में हमको धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता था, हमें अंतहीन प्रताड़नायें दी जाती थी. इसके बाद हम बड़ी उम्मीदों के साथ भारत आये थे कि भारतमाता की गोद में हमें आश्रय मिलेगा. उन्होंने बताया कि उन्हें आश्रय तो मिला लेकिन परेशानियाँ लगातार बढ़ रही हैं. उनके बच्चों को स्कूल एडमिशन तक नहीं दे रहा है. उन्होंने पीएम मोदी तथा सीएम केजरीवाल से उनकी मदद करने की अपील की है.

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