इंस्पेक्टर की हत्या के आरोपियों को जमानत मिली तो विरोध, लेकिन गौ हत्यारे महबूब अली को जो सुप्रीम कोर्ट से मिला उस पर ख़ामोशी.. और बुलंदशहर में बुलंद हुआ सेकुलरिज्म


भले ही कभी देश में सेकुलरिज्म के नाम पर तमाम प्रकार से एकपक्षीय कार्य किये गये रहे हों लेकिन अब वो सब जागृत हो चुके समाज में दोहरा मापदंड और तुष्टिकरण कहा जाता है.. कल तक की तमाम ट्रेंड खबरों में ये खबर ये भी थी कि बुलंदशहर के इंस्पेक्टर की हत्या के आरोपियों को जमानत मिल गई तो उनका स्वागत किया गया . कई तथाकथित सेकुलरिज्म के ठेकेदारों ने इस मामले में अपने अपने विचार अपने अपने अंदाज़ में रखे थे और उनका अंतिम लक्ष्य हिन्दू विरोध ही दिख रहा था .

भगवा आतंकवाद कहने और साध्वी प्रज्ञा पर अत्याचार का समर्थन करने के बाद भी शरद पवार से अलग हो रहे मुस्लिम नेता.. NCP का पूर्व विधायक अब ओवैसी के साथ

लेकिन उसी समय की एक अन्य घटना को उन्होंने अपनी खुद की रची धर्मनिरपेक्षता के सांचे में ढाल लिया है और इंस्पेक्टर की हत्या के आरोपियों को जमानत मिलना एक साम्प्रदायिक मामला व उस दूसरी घटना को धर्मनिरपेक्षता की जीत बता डाला है.. ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के स्याना कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोकशी के आरोप में गौ हत्यारे महबूब अली पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका ( NSA) पर रोक लगा दी है.

कक्षा 9 की बच्ची को नहीं छोड़ा हवस की आग में जलते ईसाई पादरी ने.. बनाया था प्रार्थना का बहाना

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आ रही खबरों के अनुसार महबूब अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उसका नाम FIR में भी नहीं था लेकिन यूपी पुलिस ने अन्य लोगों के बयानों के आधार पर उसको आरोपी बनाया। उसे जमानत ना मिले इसलिए उस पर भी रासुका लगा दिया गया। ये हिरासत पूरी तरह गैर कानूनी है और गोकशी में शामिल नहीं था।इससे पहले उसकी ओर से इस हिरासत के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस याचिका लगाई थी और हिरासत को गैर कानूनी बताया था। लेकिन मई 2019 में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। फिलहाल गौ हत्यारे महबूब अली से रासुका हटने का बुद्धिजीवी समाज के उसी वर्ग ने स्वागत किया है जो इंस्पेक्टर की हत्या मामले में जमानत पाए आरोपियों की जमानत पर नाराज है ..

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए हमें सहयोग करें. नीचे लिंक पर जाऐं–


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...