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जहर खाने वाली महिला को न्याय देने के लिए पचासों अन्य महिलाओं पर ढा दिया कहर.. शायद मुजफ्फरनगर में सिर्फ 2 अधिकारी दूध के धुले

बहुत चर्चा में है आज कल मुजफ्फरनगर, जहाँ एक तरफ एक अपराधी खुद से सरेंडर करने आता है और खुद की जान का खतरा बताता है. उस समय पुलिस के रुतबे को सब सलाम करने लगते हैं और हर तरफ उठने लगती है वाह वाह की आवाज और इसी वाह वाह में दब कर रह जाती है एक आह .. और वो आह किसी और की नहीं बल्कि एक पुलिस वाली की होती है जो सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत रहते हुए इतनी प्रताड़ित कर दी जाती है कि उसको जहर खाने पर मजबूर होना पड़ जाता है ..

यद्दपि पुलिस वालों को मिला दर्द इस देश के मीडिया की हेडलाइन कभी नहीं रहा है लेकिन कम से कम महिला सम्मान के तमाम पैरोकारों को उस समय बोलना था कि ये सब क्यों और कैसे हो रहा है ? जहर खाने वाली महिला पुलिसकर्मी सब इंस्पेक्टर नाम के उस पद पर तैनात है जहाँ निलंबन , ट्रांसफर और यहाँ तक कि बर्खास्तगी भी आये दिन की सामान्य दिनचर्चा गिनी जाती है.. इसीलिए उसकी खबर उसी अंदाज़ में दम तोड़ गई जिस अंदाज़ में उसकी साँसे धीरे धीरे टूट रही हैं .

सुदर्शन न्यूज वेब जर्नलिस्ट मुज़फ्फरनगर श्री समर ठाकुर जी के अनुसार इस मामले में अचानक ही नये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जगे और उन्होंने न्याय करने की ठान ली.. न्याय करने के नाम पर उन्होंने वो कर डाला जिसके बाद अस्पताल में कराह रही एक महिला पुलिसकर्मी के बजाय सीधे सीधे 50 के करीब अन्य महिला पुलिसकर्मी पुलिस लाइन में कराहने लगीं.. कप्तान साहब ने पूरा का पूरा महिला थाना ही लाईन हाजिर कर दिया.. ठीक वैसे ही जैसे कोई बहुत कुशल डाक्टर ऊँगली में चोट लगने के बाद पूरा पैर ही काट कर अलग कर दे .. इशारा साफ न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी ..

जहर खाने वाली महिला सब इंस्पेक्टर का नाम सीमा यादव है जिन्होंने कीटनाशक पी लिया है .. पहले दिन से ही इस मामले में क्षेत्राधिकारी का नाम आ रहा है जिनका नाम हरीश भदौरिया है . महिला सब इंस्पेक्टर के परिजनों के अनुसार क्षेत्राधिकारी हरीश भदौरिया की प्रताड़ना भी जिम्मेदार है इन हालातों के लिए लेकिन न्याय करने की जिम्मेदारी अंत में उन्हें ही दे दी गई SSP मुज़फ्फरनगर द्वारा .. मतबल ये कहना गलत नहीं होगा कि दूध की रखवाली बिल्ली को सौंप डाली गई ..

अंत में वही हुआ , क्षेत्राधिकारी भदौरिया ने अपने आप को पूरी तरह से खुद से क्लीन चिट देते हुए पूरा महिला थाना लाइन हाजिर करने की रिपोर्ट लगाईं . यहाँ पर SSP को अपने स्वविवेक का प्रयोग करना था लेकिन उन्होंने बिल्ली द्वारा दूध की रखवाली को एकदम सही और न्यायपूर्ण माना और पूरे थाने को लाइन हाजिर कर डाला.. अब जिस मुज़फ्फरनगर में 1 महिला पुलिसकर्मी अस्पताल में कराह रही थी, वहां 50 के आस पास महिला स्टाफ लाईन में कराह रही हैं .

इन लगभग 50 में एकाध को छोड़ कर बाक़ी तमाम वो भी हैं जिनका इस घटना से कोई दूर दूर तक का लेना देना भी नहीं था.. कोई कहीं अन्यत्र तैनात थीं तो कोई कही अन्य लेकिन जब कोई अपने दोष का नामोनिशान मिटाने पर आ जाए तो कुछ ऐसे ही नजारा देखने को मिलता है.. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस मामले में महिला सब इंस्पेक्टर ने जहर खाया है उसमे क्षेत्राधिकारी भदौरिया सीधे संलिप्त थे और इसकी जानकारी SSP अभिषेक यादव को भी थी लेकिन अंत में पूरा दोष महिला थाने पर डाल कर ये साबित किया गया है कि मुज़फ्फरनगर जिला एक पुरुष प्रधान जनपद है.

सुदर्शन न्यूज वेब जर्नलिस्ट मुज़फ्फरनगर श्री समर ठाकुर जी के अनुसार अब तक हुई कार्यवाही में मात्र 2 लोग ही दूध के धुले साबित हो रहे हैं . पहला पुलिस क्षेत्राधिकारी हरीश भदौरिया और दूसरे SSP अभिषेक यादव ..  इस मामले में जहर खाने वाली सब इंस्पेक्टर की सीनियर थानेदार इंस्पेक्टर प्रीता रानी को आरोपी बताया गया था लेकिन कार्यवाही सब पर कर दी गई, वो भी बिना शिकायती पत्र के.. यदि SSP मुज़फ्फरनगर को पता था कि महिला थाने में सभी स्टाफ लाइन हाजिर किये जाने योग्य हैं तो उन्होंने एक स्टाफ के जहर खाने का इंतजार क्यों किया ?

अगर ये कार्यवाही स्टाफ के जहर खाने को ले कर की गई है तो क्या बाद में SSP महोदय से साबित कर पायेंगे कि महिला स्टाफ के जहर खाने में उन सभी का हाथ था और किसका कितना योगदान था .. ? पुलिस क्षेत्राधिकारी भदौरिया को क्या क्लीन चिट दे डाली गई है ? यहाँ पर ये ध्यान रखने योग्य है कि वर्तमान SSP मुज़फ्फरनगर अभिषेक यादव जब जब SP GRP आगरा थे तब इनके ही अधीनस्थ इंस्पेक्टर और सिपाही सहारनपुर में डकैती करते हुए पकडे गये थे …

तब सहारनपुर पुलिस को पता चल गया था कि आगरा GRP का इंस्पेक्टर डकैत है लेकिन इन्हें अपने नीचे क्या हो रहा है ये तब भी पता नहीं था .. अब भी लगभग वही हालत हैं मुज़फ्फरनगर में.. नीचे क्या हो रहा है अगर ये पता होता तो 1 महिला स्टाफ अस्पताल में और बाकी महिला स्टाफ लाइन में न होतीं . वो जिला महिला पुलिसकर्मियों की चीखों और आंसुओं के लिये आज चर्चा में न होगा .. एक सवाल और भी बनता है यहाँ पर कि जब महिला थाने में कोई स्टाफ ही नहीं है तो मुज़फ्फरनगर की आम महिलाओं की सुरक्षा कौन का रहा है ?

क्या ये जिम्मेदारी अब तक बेदाग़ साबित हो रहे क्षेत्राधिकारी भदौरिया जी उठा रहे हैं .. और जो अपने अधीनस्थ महिलाओं की सुरक्षा नही कर सके क्या उनसे जिले की आम महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद की जा सकती है ? पुलिस में स्टाफ की कमी का आये दिन रोना रोने वालों ने अचानक ही एक साथ 50 से जायदा स्टाफ को कार्यहीन कर दिया है . क्या इस से आपेक्षित बल की पूर्ति होगी ? क्या इसी सिद्धांत पर भविष्य में कोई शक्तिशाली मुख्यमंत्री एक अधिकारी की गलती पर पूरे जिले पर कार्यवाही का सिद्धांत नहीं लागू कर सकता ?

यहाँ पर सवाल खड़ा होता है महिला सुरक्षा और सम्मान की बात करने वाले शासन में बैठे तमाम शासको से कि जब वर्दी में एक महिला की जान और बाकी सबका सम्मान सुरक्षित नहीं है तो   आम जनमानस का क्या होता होगा ? मुज़फ्फरनगर को पुरुष प्रधान का ठप्पा जब जब भी   दिया जाएगा तब तब वर्तमान SSP और CO का नाम जरूर लिया जायेगा .. सुदर्शन न्यूज जल्द ही मुज़फ्फरनगर का सारा सच प्रमाणों के साथ सामने लाएगा जिसके बाद इस घटना और बाकी इसके जैसी कई अन्य घटनाओं में हुए कई अत्याचार और अन्याय का खुलासा होगा.. तथ्य साभार श्री समर ठाकुर , संवाददाता व वेब जर्नलिस्ट , मुज़फ्फरनगर

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा

मोबाइल –  09598805228

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