क्या तालिबान बन रहा तेलंगाना ? हिंदुओं के पर्व पर परंपरा रोकी और बोले – “जरूरी थी ये रोक”

यदि किसी को भारत की बदल रही धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा को सच्चे स्वरूपों में देखना है तो वो निश्चित रूप से कश्मीर न जा कर तेलंगाना के हालात देख सकता है जहां पर न सिर्फ कट्टरपंथियों का कहर हिंदुओं पर आए दिन गिरता है बल्कि खुद सरकार के नए नए आदेश भी हिन्दू समाज के उन परंपराओं पर बिजली बन कर गिरते हैं जिन्हें हिन्दू कई सदियों से चलाते आ रहे हैं..इसमें उन स्वघोषित बुद्धिजीवियों का भी बहुत बड़ा हाथ है जिनके ज्ञान सिर्फ शांतिप्रिय हिन्दू समाज को बांटने के लिए होते हैं.. विदित हो कि एक नए फैसले से एक सवाल खुद से उठ खड़ा हुआ है कि क्या तेलंगाना बन रहा है भारत के अंदर एक नया तालिबान ?

विदित हो कि नए सरकारी और प्रशासनिक आदेश के बाद अब तेलंगाना में मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी को प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है .. सबसे हैरानी की बात ये है कि पुलिस द्वारा जारी किया गया के आदेश मात्र 14 और 15 तारीख के लिए प्रभावी किया गया है जो हिंदुओं के पवित्र दिवस मकर संक्रांति का दिन है..सवाल ये है कि सिर्फ 2 दिनों के लिए ही प्रतिबंध क्यों .?इस आदेश को तामील करवाने के लिए तेलंगाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अंजनी कुमार ने सख्त हिदायत भी अपने अधीनस्थों को दी है और ऐसा करने वालों को के खिलाफ सख्ती के निर्देश भी ..

अंजनी कुमार का साफ कहना है कि मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं और सामाजिक सौहार्द बनाये रखने के लिए ये आदेश जारी हुआ है ..यहां कुछ हिन्दू संगठनों का कहना है कि पुलिस द्वारा जारी किया गया आदेश असल मे शासन की तरफ से आया इशारा है जो ओवैसी जैसों के दबाव में लिया गया है ..सवाल ये भी है कि यदि सड़को आदि को रोक कर मज़हबी कार्य करने से सामाजिक सौहार्द नही बिगड़ता है तो मात्र पतंग उड़ाने भर से कौन सा सामाजिक सौहार्द बिगड़ने वाला है ..सुदर्शन न्यूज आज दिन पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा और तेलंगाना सरकार से जवाब मांगता रहेगा कि उसके हर आदेश के निशाने पर हिन्दू ही क्यों होते हैं ?

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