जिसके अब्बा के जनाज़े में कंधा दिया था सेकुलर हिन्दू संतो ने और कब्र पर फूट – 2 कर रोये थे.. उसकी औलाद कर चुकी थी ये सब, और करने वाली थी कुछ और भी

यकीनन अगर सेकुलरिज्म की बात आएगी तो उसके जनक भले ही कोई और कहे जाएँ पर उसके पोषको में हिन्दू साधू संतो का भी नाम आएगा जिन्होंने अपने ही आराध्य श्रीराम के खिलाफ अदालत में खड़े एक व्यक्ति के लिए वो सब कुछ किया जो किसी के परिवार और रिश्तेदार किया करते हैं .. आज दुनिया भर में धर्मनिरपेक्षता की कोई और ऐसी मिसाल नहीं मिल सकती है जो अयोध्या के संतो ने दिखाया था लेकिन उनको नहीं पता था की उनकी धर्मनिरपेक्षता सींच रही है एक उन्मादी को .

विदित हो की बाबरी और श्रीराम जन्मभूमि का मामला अदालत में दशको से चल रहा है.. हिन्दू अपने ही आराध्य की जन्मभूमि को उनका बताने के लिए दशको से जिला न्यायलय से ले कर उच्चतम न्यायालय तक चक्कर लगा रहा है लेकिन उसके बाद भी ये एलान कर दिया जाता है की अगर अदालत भी आदेश दे देती है तो हिन्दुओ को वहां एक ईंट भी नहीं रखने दी जायेगी . ये एलान है बाबर की तरफ से मुद्दई हाजी इकबाल को जो अयोध्या में ही संतो के साथ रहते हैं .

इन्ही हाजी इकबाल के अब्बा के इंतकाल में अयोध्या के कई साधू संत शामिल हुए थे . वो जनाज़े के साथ चले थे और हाशिम अंसारी की कबर पर फूट फूट कर रोये भी थे.. इतना ही नहीं , हाशिम अंसारी के जीते जी वही संत हाशिम अंसारी को भगवान राम के खिलाफ मुदकमा लड़ने में मदद भी करते थे जबकि उन संतो का खुद का अस्तित्व ही श्रीराम के चलते मौजूद है.. हाशिम अंसारी को खुश करने के लिए मन्दिर परिसर तक में रोजा इफ्तारी करवाई गई लेकिन उन्हें नहीं पता था की उसका फल क्या मिलने वाला है .

उसी हाशिम अंसारी का बेटा इकबाल अंसारी अब बाबर का पक्षकार है न्यायालय में.. उसने एक स्टिंग आपरेशन में ऐसी बातें कहीं जो किसी का खून खौलाने और किसी में भय भरने के लिए काफी है.. हाजी महबूब अंसारी ने एक स्टिंग आपरेशन में साफ़ साफ़ कहा है की अगर सुप्रीम कोर्ट भी हिन्दुओ के पक्ष में फैसला दे देता है तो वो और उनके साथी अयोध्या में मन्दिर के लिए एक ईंट भी नहीं रखने देंगे.. इतना ही नहीं, हाजी महबूब ने ये भी बताया कि उसने वर्ष १९९२ में श्रीराम भक्तो पर बम फेंके थे..

वर्ष १९९२ में हाशिम अंसारी भी जीवित थे और ऐसा सम्भव नहीं है की उन्हें हाजी महबूब और हाजी इक़बाल की बम फेंकने वाली बात का पता न रहा हो लेकिन उसके बाद भी वो संतो के साथ अपने एक दूसरे चेहरे के साथ घुले मिले रहे और कई संतो ने भी उनके साथ मिल कर इफ्तारी आदि की.. यद्दपि इस खुलासे के बाद भी तमाम सेक्युलर संत अभी भी अपनी विचारधारा पर कायम हैं लेकिन कई संतो इस खुलासे से बेहद आक्रोशित हैं और कार्यवाही की मांग कर रहे हैं .

 

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