घुसपैठी रोहिंग्या नहीं भारत की रीता के लिए खड़ा हो समाज जिसने बेटा गिरवी रखा पति के दाह संस्कार हेतु

रोहिंग्या आतंकियों जो बौद्धों के रक्त से अपने हाथ रंग के आये हैं उनके लिए जिस प्रकार से धरना और प्रदर्शन आदि चल रहे हैं यदि उसका आधा भी भारत के अन्दर रह रहे तमाम गरीबों पर ध्यान दिया जाता तो यकीनन देश की दशा और दिशा दोनों बदल जाती पर केवल एक ही वर्ग के लिए आवाज उठाना और गरीबी में भी जाति के साथ मत मजहब देखने की ये मानसिकता भारत को नुक्सान पंहुचा रही जिसका अंदाजा रोहिंग्या आतंकियों के समर्थकों को कतई नही है .

ज्ञात हो की उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ा यह मामला वैसे तो पुराना है लेकिन इस शोले की चिंगारी को आज इस लिए हवा दे रहे हैं, ताकि लोगों के बीच मरती इंसानियत में थोड़ी जान फूंकी जाए। क्योंकि इस मामले के बाद भी ऐसे कई तरह के मामले सामने आए, जिससे ऐसा साबित होता है कि वो हैं तो हमारे इस सभ्य समाज का हिस्सा लेकिन उनमें इंसानियत जैसी कोई चीज है ही नहीं। दरअसल पिछले दिनो आगरा में एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई थी, जिसमें बताया गया कि एक महिला ने अपने पति के अंतिम संस्कार के लिए अपने सात साल के बच्चे को गिरवी रखा था। जानकारी के अनुसार महिला के पति के देहांत के बाद उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो अपने पति का अंतिम संस्कार कर सके, इसलिए उसने गांव के महाजन के पास अपने 7 साल के बच्चे सोनू को गिरवी रखकर 2 हजार रुपये लिए और पति का अंतिम संस्कार किया।

पति का अंतिम संस्कार करने के बाद बचे हुए पैसों से उसमे कुछ दिनो तक अपना घर चलाया, लेकिन इतनी मजबूरियों पर भी मां की मतता भारी पड़ी और उसने अपने बेटे को छुड़ाने के काम की तलाश में जुट गई, लेकिन उसे किसी ने काम भी नहीं दिया, आखिर में वह अपने जेठ पप्पू और अन्य लोगों के साथ काम की तलाश में आगरा आ गई लेकिन यहां उसके अपनों ने उसका साथ छोड़ दिया और वह दर-दर भटकने को मजबूर हो गई। बताया जाता है कि रीता के दो मासूम बच्चे उसके साथ थे, ऐसे में वह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए कभी कूड़े के ढेर से जूठन उठाकर तो कभी नाली का पानी पिलाकर बच्चों का पेट भर रही थी। तभी एक दुकानदार की नजर इस लाचार महिला पर पड़ी, उसने उसके पास जाकर सारी बात पूछी और दुकान से खुद पानी की बोतल खरीद कर उसे दी।

इस घटना को जिस ने भी देखा वो द्रवित हो गया . साथ ही ये घटना एक सबक दे कर गयी है की देश में आंतरिक समस्याएं भी इतनी हैं जिसको सुधारने में समय लगेगा , बाहरी घुसपैठियों की आवभगत अगर नहीं की तो भी . 

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