पुलिस को बदनाम करने व आधे दर्जन मुकदमो में वांछित एक अभियुक्ता इंस्पेक्टर लक्ष्मी को बोलती थी दीदी… मोदी और योगी को अपमानित करने वाली मुलजिम इंस्पेक्टर साहिबा को करती थी सम्मानित

जिस गाजियाबाद को फिल्म जिला गाज़ियाबाद में विकृत रूप में दर्शाया गया है असल में वो वैसा एकदम नहीं है लेकिन समाज के कुछ वर्गों से कुछ ऐसे तत्व जरूर थे जो गाजियाबाद को उस रूप में ले जाना चाह रहे थे.. गाजियाबाद को उसके विकृत रूप में ले जाने की कोशिश करने वाले गंदी राजनीति करने वाले कुछ सफेदपोश हैं , गंदे काम करने वाले कुछ अपराधी हैं और इन सबमे सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि कुछ पुलिस वाले भी हैं जिसमे से एक का नाम आज कल मीडिया ही नही जनता में भी गूँज रहा है..

गाजियाबाद जनपद में आज कल इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान जी का नाम सुर्खियों में है.. बरामद पैसे से ज्यादा खुद रख लेने का आरोप लगा है उन पर.. उनके नेतृत्व में जो टीम थी वो पूरी की पूरी टीम एक गलत सेनापति के नेतृत्व का खामियाजा भुगत रही है भले ही उनमें से कुछ के दोष मात्र इतने हों कि वो इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान की उस टीम से शामिल थे जिसका उपयोग अपराध के दमन के बजाय पैसे के गबन में ज्यादा किया गया है. गाजियाबाद ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस की शाख पर ये एक बड़ा दाग है.

जिसके नाम के साथ कल तक सिंघम और न जाने क्या क्या लग रहे थे अब उनके असली रूप के दर्शन गाजियाबाद कर रहा है.. अब आम जनता के लिए एक बड़ी समस्या ये है कि वो पैसे किस से बचाए ? लुटेरो से या पुलिस से ?गाजियाबाद एक वर्तमान SSP श्री सुधीर कुमार जी की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है .. मुज़फ्फरनगर से आने एक बाद उन्होंने अपनी तरफ से हर सम्भव कोशिश की गाजियाबाद के कानून और व्यवस्था को पटरी पर लाने की .

लेकिन उनके लिए अब दोहरी चुनौती सामने आ रही है . पेशेवर और दुर्दांत अपराधियों के साथ धन को लूटने या गबन करने वाले नकली सिंघम इंस्पेक्टरों या पुलिसवालों की भी. वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पहले किस अधिकारी ने जिले को किस हाल में छोड़ा था ये भी विचार का विषय होगा.. फिलहाल खाकी एक बार फिर से कलंकित हुई है गाजियाबाद में और उसकी सूत्रधार बनी हैं इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान जिनके इस रूप को जनता ही नही शायद खुद पुलिस वाले ही नहीं जानते रहे होंगे .

इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान के नेतृत्व में कार्य करने वाली पुलिस टीम पर आरोप है कि इन्होंने रिकवरी किए गए पैसों में गड़बड़ी की है. इस मामले में 60 लाख की राशि की रिकवरी की गई थी, जिसमें पुलिसकर्मियों ने बड़ी मात्रा में हेरफेर की. दो इंस्पेक्टर के साथ 5 कॉन्सटेबल सस्पेंड किए गए हैं. माना ये जा रहा है कि एटीएम में कैश डालने वाली कंपनी के साढ़े तीन करोड़ रुपये गबन के मामले में लिंक रोड पुलिस इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान के नेतृत्व में 70 लाख रुपये डकार गई है . यद्दपि अभी इस मामले में जांच चल रही है..

इस मामले का एक अनछुआ पहलू ये है कि इस गबन के मामले में आरोपित की गईं तथाकथित सिंघम और अब अपने असली रूप में प्रस्तुत लक्ष्मी चौहान सोशल मीडिया पर उस अभियुक्ता के साथ गहरी दोस्ती में दिखाई दे रही हैं जो लगभग आधे दर्जन मामलों में नामजद है और वर्तमान में गाजियाबाद की जेल में बंद है.. दीप्ति शर्मा नाम की ये महिला फ्राड , जालसाजी , झूठे आरोपों व हमला कराने आदि कई मामलो में नामजद है और गजियाबाद से ले कर बुलंदशहर तक की पुलिस के रिकार्ड में है..

शायद ही ऐसा कोई योग्य IPS अफसर न हो जिसको इस अभियुक्ता ने नैतिक , चारित्रिक व समाजिक रूप से बदनाम करने में कोई कसर छोड़ी हो.. किसी को फोन रिकार्डिंग पर अपना आदमी बताना, किसी के घर में घुस कर वहां की चुपके से रिकार्डिंग लेना , किसी के खिलाफ फेसबुक और ट्विटर से बेहद अशोभनीय टिप्पणी करना आदि उनके अपराध से ज्यादा शौक में शुमार दिखाई देते हैं. लेकिन इसके बाद भी पुलिस विभाग को अपना दुश्मन मानने वाली अभियुक्ता दीप्ति शर्मा की इतनी करीबी इंस्पेक्टर लक्ष्मी से क्यों और कैसे थी ये शायद किसी की भी समझ से परे होगा ..

सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान की बेहद करीबी दिख रही ये आम आदमी पार्टी से जुडी ये बेहद शातिर कही जाने वाली अभियुक्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में भी नामजद है और इसने भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की पत्नी पर भी बेहद अशोभनीय टिप्पणी की है जिसके खिलाफ चंदौली पुलिस को एक सामाजिक संगठन द्वारा FIR करने हेतु शिकायती प्रार्थना पत्र प्रेषित किया जा चुका है और चंदौली पुलिस उस शिकायत का अध्ययन कर रही है..

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने वाली व आधे दर्जन मामलों में नामजद ये अभियुक्ता कई तस्वीरों में इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह को दीदी और अपनी बहन के रूप में लिखती दिखाई दे रही हैं . सबसे ख़ास बात तो ये है कि इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह की भी तरफ से बराबर सहयोगात्मक व प्रेम दिखाई देर रहा है . एक जगह तो वो अभियुक्ता इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह को सम्मानित भी करती नजर आ रही हैं जिसके संलग्न लिंक नीचे हैं .. ये ध्यान रखने योग्य है कि दीप्ति शर्मा द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपमान पर गाज़ियाबाद के ही सिहानी गेट थाने में मुकदमा संख्या 721 / 19 दर्ज है.. 

अब सवाल ये उठता है कि जब बाड ही खेत खाने लगे और नदी ही किनारों को डुबोने लगे और पुलिस ही लूटखोरी में हिस्सा बांटने लगे तो आम जनता किस से उम्मीद करे ? सवाल यहाँ इस मामले में सजा पाए कुछ सिपाहियों का भी उठता है कि अगर उनका नेतृत्वकर्ता भ्रष्टाचार पर आमादा था तो क्या वो उनका विरोध कर के वहीँ अपनी नौकरी दांव पर लगाते ? जालसाजी , गबन के साथ प्रधानमन्त्री व मुख्यमंत्री का अपमान करने वाली जिस इंस्पेक्टर का सम्मान कर रही हो उसकी विचारधारा को समझना बहुत मुश्किल नहीं है..

इंस्पेक्टर लक्ष्मी जी का ये नया रूप एक बड़ा धक्का है उन महिलाओं के लिए जो उन्हें लेडी सिंघम आदि मान कर पुलिस में जाने और देश की सेवा करने के सपने देखा करती थीं . इस मामले में जनपद गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को अंतिम निर्णय पर पहुचना है जो अपनी न्यायप्रियता के लिए विख्यात हैं .. यद्दपि इसमें प्रारंभिक जांच में क्षेत्राधिकारी ने काफी कुछ साफ़ कर दिया है लेकिन आम जनमानस को अभी भी लगता है कि न्याय अभी अधूरा है .. देखिये सम्बन्धित फोटो –

 

दीप्ती शर्मा द्वारा इंस्पेक्टर लक्ष्मी जी के सम्मान का फोटो  – 

सम्बन्धित स्क्रीनशॉट- 

 

दीप्ति शर्मा द्वारा प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का किया गया अपमान –

 

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