कुछ को ऐसा लग रहा जैसे ये योगी शासित लखनऊ नहीं बल्कि ममता शासित कोलकाता हो.. एक ही पुलिस के २ रूप कैसे ?

इस घटना को लिखने से पहले ये जान लीजिये कि ये घटना लखनऊ पुलिस से संबंधित है . इस जिले जिसको उत्तर प्रदेश की राजधानी कहा जाता है के पुलिस की जिम्मेदारी SSP कलानिधि नैथानी के हाथों में है.. इनको इनकी निश्चिंतता के लिए जाना जाता है , मीडिया में क्या चल रहा है , जनता के मन में क्या चल रहा है इस से ये निश्चिंत रहते हैं … यद्दपि निश्चिंतता कभी कभी अच्छी बात भी होती है लेकिन कई बार वो लापरवाही और अहंकार भी कही जाती है .

फिलहाल अपने अधिनस्थों को भरे चौराहे पर बेइज्जत करने के लिए विख्यात इस जिले में एक कश्मीरी की पिटाई करने वाले कुछ हिंसक प्रवित्ति के लोगों की पुलिस द्वारा कड़ी धाराओं में त्वरित गिरफ्तारी इस समय देश के कोने कोने में चर्चा में है . धारा 307 के तहत हुई गिरफ्तारी भी हर किसी के मन को सुकून दे रही है और कलानिधि नैथानी इस समय राष्ट्रीय हीरो के रूप में देखे जा रहे हैं .. वो खुद भी ट्विट पर ट्विट किये जा रहे हैं और अपनी बहादुरी के चर्चे भी रिट्विट कर रहे हैं ..

फिलहाल इस समय तमाम लोग लखनऊ पुलिस को न्याय का प्रतीक मान रहे हैं … लेकिन उसी समय उस बड़े शोर में दब रहा है कुछ ऐसा जो किसी के साथ अन्याय माना जाएगा .. जिस लखनऊ में कश्मीरी पर हाथ उठाना बन गया राष्ट्रीय आपदा का विषय उसी लखनऊ में हिन्दुओ को गाली देना, भारत माता को अपमानित करना और भारत के वीर जवानों के लहू से सने पुलवामा को दोहराने की धमकी देना उसी लखनऊ पुलिस के लिए एक बेहद सामान्य बात है .

ये कुकृत्य है सैयद ए हसन अहमद द्वारा किया गया . इस व्यक्ति ने पहले तो एक व्हाट्सएप ग्रुप में हिन्दू समाज के साथ भारत माता को अपमानित किया फिर उसके बाद फोन किये जाने पर खुद को वामसेफ का सदस्य बताते हुए बेहद आपत्तिजनक बातें कि जो धार्मिक सौहार्द के साथ राष्ट्रीय अस्मिता के भी खिलाफ थीं . इतना ही नहीं , उस सैयद ए हसन अहमद ने खुल कर पुलवामा दोहराने की धमकी दी जिसको गम्भीरता से लेते हुए एक जागरूक व्यक्ति ने फ़ौरन ही पुलिस तक पहुचाया .

लेकिन लखनऊ पुलिस के लिए पुलवामा दोहराना, भारत माता को अपमानित करना और हिन्दुओ को गाली देते हुए सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की बात करना कोई गम्भीर विषय नहीं था.. यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि ये वही लखनऊ पुलिस है जिसने कभी हिन्दू महासभा के कमलेश तिवारी पर मात्र उनके लिखे शब्दों के चलते रासुका के तहत कार्यवाही कर डाली थी लेकिन जब बात सैयद ए हसन अहमद की हो तो कलानिधि नैथानी द्वारा संचालित लखनऊ पुलिस के मापदंड बदल जाते हैं ..

हिन्दू संगठनो को खुश करने और शिकयतकर्ता को लोलीपोप जैसा देने की तरह जैसे तैसे मुकदमा पंजीकृत भी हुआ तो धाराएं लगाईं गयी मात्र 506 और 507. ये थाना था आशियाना जो नैथानी के ही प्रिय अधीनस्थ के द्वारा संचालित है और इसकी विवेचना कथित रूप से जांबाज़ कहे जाने वाले सब इंस्पेक्टर अजीत कुमार कर रहे हैं . .. पुलवामा दोहराने की धमकी देने वाले पर 506 और 507 व् कशमीरियो को पीटने वालों पर धारा लगी 307 को देख कर उन्मादी सैयद ए हसन के खिलाफ कार्यवाही चाह रहे कईयों के मन में आने लगा कि काश वो भी कश्मीरी होते ..

उसके बाद से आज तक उस सैयद ए हसन पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही तो दूर एक कदम भी नहीं बढ़ा पाई है वो लखनऊ पुलिस को योगी आदित्यनाथ द्वारा शासित उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सुरक्षा करती है.. पुलवामा के नाम से जहाँ देश के हर वर्ग की आँखे या तो आक्रोश से भर जाती हैं या श्रद्धा से झुक जाती हैं लेकिन उसी पुलवामा को दोहराने की धमकी देने वाले उन्मादी के खिलाफ लखनऊ पुलिस की आँखें पथराई सी हैं .. यहाँ ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि शायद IPS कलानिधि नैथानी इस बार भी ये सोच कर निश्चिन्त हैं कि वो और उनका रूतबा कायम रहेगा जिस पर कोई आंच नहीं आने वाली और इसके साथ ही उनके द्वारा कशामिरियो के मामले में पाई गई प्रसिद्धि उस बैंक बैलेंस के समान है जो अभी कुछ दिन जरूर चलेगी . फिलहाल कुछ लोगों का दबी जुबान से कहना है कि उन्हें लगता ही नही कि वो योगी आदित्यनाथ शासित लखनऊ में हैं या ममता बनर्जी शासित कोलकाता में .फ़िलहाल सैयद ए हसन लखनऊ पुलिस की कार्यवाही के बाद खुद को निश्चिंत महसूस करता दिखाई दे रहा है , ठीक लखनऊ के एसएसपी की तरह ..

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