मध्यप्रदेश में शुरू हुआ भाजपा नेताओं की हत्या का दौर..अब एक और BJP नेता की मिली लाश

न ही किसी प्रकार का असहिष्णुता काशोर है और न ही किसी को लग रहा है डर.. न जाने क्यों सब को सब कुछ सामान्य दिखने लगा है अब..मध्य प्रदेश में मंदसौर के नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता प्रहलाद बंधवार की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया है। बंधवार को गुरुवार शाम लगभग सवा सात बजे अज्ञात बाइक सवार ने गोली मार दी। जिला सहकारी बैंक के सामने हमलावर ने करीब से बंधवार के सिर पर गोली चलाई, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, बाजार बंद हो गए।

जानकारी के अनुसार, नपा अध्यक्ष बंधवार शाम करीब सात बजे जिला सहकारी बैंक के सामने स्थित भाजपा नेता लोकेंद्र कुमावत की दुकान पर बैठे थे। जैसे ही वह बाहर निकले, बुलेट पर सवार एक बदमाश ने पास आकर उनके सिर पर गोली मार दी। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले हमलावर बुलेट छोड़कर भाग गया। माना जा रहा है कि हत्यारा पेशेवर शूटर हो सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में इकट्ठा हुए बंधवार समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। वहीं, मामले में पुलिस क्षेत्र के सभी सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है। सीएसपी राकेश मोहन शुक्ला ने बताया कि आसपास के जिलों की भी सीमा सील कर संदिग्ध की धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस ने मौके पर मिली बुलेट के आधार पर कुछ संदिग्धों से पूछताछ शुरू की है। हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पा रहा है कि हत्या करने की वजह क्या है। क्योंकि, नपा अध्यक्ष का प्रॉपर्टी व रुपये आदि के लेन-देन को लेकर किसी से विवाद नहीं था।मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, ‘बंधवार की हत्या कायरानापूर्ण हरकत है। जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है, प्रदेश में कानून-व्यवस्था ठप हो चुकी है। हीना कांवरे के बाद यह दूसरी बड़ी घटना है। 24 घंटे में आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो भाजपा कड़ा रख अपनाएगी।’

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बंधवार की हत्या की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। यह हत्या अपराधियों के बढ़ते मनोबल को दर्शाती है। एक दिन पहले ही इंदौर में संदीप की हत्या से ऐसा महसूस होता है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आते ही आपराधिक तत्वों को राजनीतिक संरक्षण मिलना प्रारंभ हो गया है।

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