होता था मुख्यमंत्री का अपमान, लेकिन पुलिस अधिकारी देखते थे डांस.. कुछ समय पहले की बात है, एक जिला ऐसा भी था उत्तर प्रदेश में


एक अधिकारी को हालात संभालने के लिए आखिर क्या क्या झेलना और करना पड़ता है इसको वो कभी खुद सेवा में रहते हुए नहीं बताता है लेकिन यकीनन ये महसूस करने वाली बात है .. पुलिस को देख कर जहां सभ्य समाज मे शांति और सुरक्षा का एहसास हुआ चाहिए तो वहीं अपराधियों में भय भी व्याप्त होना चाहिए पर उस समय क्या किया जा सकता है जब खुद पुलिस वालों को ही हो अपराधी के डांस की प्रतीक्षा हो.. ये सब कुछ जीवंत रूप में चल रहा था गाजियाबाद में लेकिन उसकी कमान जिसके हाथ मे थी वो उल्टे उसी पर सख्ती दिखा रहे थे जो इन सबको खत्म करने की मांग कर रहे थे…

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक निन्दनीय टिप्पणी होती है और उस पर हिन्दू युवा वाहिनी उबल पड़ती है.. तमाम चेहरों पर आक्रोश दिखाई देने लगता है लेकिन जो पूरी तरह से निश्चिंत थे वो थे पूर्व SSP गाजियाबाद व वर्तमान SP सिटी.. मुख्यमंत्री के आदेश हर दिन आते थे कि सबके सम्मान की रक्षा हो लेकिन खुद उनका अपमान होता था गाजियाबाद में और पुलिस वाले चुपचाप देखते थे..यद्द्पि किसी अधिकारी की नई तैनाती में उस से तेजी और जोश की आशा की जाती है लेकिन गाजियाबाद के नए युवा SP सिटी में जोश तो था, शायद लेकिन किसी और चीज का..

संभव है कि थाना कवि नगर से फ्राड के मामले में गिरफ्तार अभियुक्ता ने उस जोश को भांप लिया था और इसीलिए फरार होने के बावजूद हर दिन ऑनलाइन आ कर अश्लील डांस करती रही.. मोबाइल ट्रेस कर के मोबाइल चोरी मामले के उस बीच कई खुलासे गाज़ियाबाद पुलिस ने किए पर किसी मोबाइल से बाकायदा आधे आधे घण्टे की फेसबुक, ट्विटर व यूट्यूब वीडियो बनाई जाती रही लेकिन उस मोबाइल को ट्रेस करने का साहस व न कर सके जबकि उक्त अभियुक्ता पासपोर्ट में फर्जी कागजात के साथ सीधे मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी मामले में वांछित थी.. वैसे भी वो अभियुक्ता आडियो रिकार्डिंग में IPS अधिकारी तक को ये कहती पाई गई थी कि- वो तो अपना आदमी है.. फिर उस पर हाथ डालने में शर्म और संकोच करने वाले उस समय के पुलिस अधिकारी उसके आदमी नही थे, ये कैसे माना जाय .. इस बीच मे वो अभियुक्ता दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भी दिखी जो गाजियाबाद से मात्र 10 किलोमीटर था.. कैसे माना जाय कि पुलिस को इच्छा थी उसकी गिरफ्तारी की.. अभी भी अभियुक्ता के फेसबुक पर तमाम ऐसे वीडियो, पोस्ट डेट , समय के साथ मिल जाएंगे जो उसने अपनी फरारी के दौरान डाली हैं.. यहां सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा था थाना साहिबाबाद जिस क्षेत्र की अभियुक्ता रहने वाली थी.. कहना गलत नहीं होगा कि इस अपराध को सबसे ज्यादा साहिबाबाद थाने ने ही सींचा और सींच सींच कर बड़ा पेड़ बना डाला जबकि उसी थाने में अदालत के आदेश से इसी अभियुक्ता पर 2 माह पुराना पासपोर्ट में फर्जी कागज की फाइल धूल खाती रही.. लेकिन अंत मे फिर वही मजबूरी  और वो मजबूरी थी डांस की..

निश्चित तौर पर सराहना के पात्र है नवागत SSP सुधीर कुमार सिंह ..  इनकी तैनाती के बाद अभियुक्ता का लाइव वीडियो भी आना कम हुआ और उसने अपना नया ठिकाना दिल्ली बनाया .. उसको डर मात्र SSP सुधीर से लगा जिनके कार्यो को निश्चित तौर पर उसने मुज़फ़्फ़रनगर तक सुना रहा होगा.. शायद संभव ये भी है कि नवागत अधिकारी को डांस के शौक में कर्तव्य भूल बैठे कुछ पुलिसकर्मियो ने भ्रामक तथ्य देने के प्रयास किये रहे हों लेकिन आखिरकार वही हो रहा जो न्याययोचित था..यहां ये सोच कर भी रोंगटे खड़े होते है SSP सुधीर कुमार सिंह के आने से पहले गाजियाबाद की आम जनता के क्या हालात रहे होंगे जब मात्र डांस के शौक में पुलिस वाले मुख्यमंत्री का अपमान तक मैनेज कर लिया करते थे. यहां इतना जरूर कहना होगा कि बहुत कठिन डगर है गाजियाबाद के कप्तान की क्योकि विभाग के बाहर अपराध के शौकीन लोग हैं और विभाग के अंदर डांस के…

 


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