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अगर आपकी भी आस्था है आस्था अस्पताल में तो आपके साथ ही हो सकता है वो सब जो हुआ एक महिला के साथ.. महिला नहीं बल्कि मानवता की मौत चंदौली में

नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के ठीक बगल जनपद चंदौली में जो कुछ भी हुआ है उसको सिर्फ एक महिला की मौत नहीं कहा जाएगा बल्कि उसको मानवता की मौत कहा जाएगा . एक गरीब महिला को सलाह मिलती है आस्था अस्पताल में आस्था रखने की, उसको विश्वास हो जाता है कि वहां उसका इलाज बेहतर होगा और उसी आस्था और विश्वास के चलते उसके कदम आस्था अस्पताल की तरफ बढ़ जाते हैं. उसको पता भी नहीं था कि उसके कदम मौत की तरफ बढ़ रहे थे .

सुदर्शन न्यूज के जनपद चंदौली के संवाददाता प्रशांत सिंह द्वारा मिली रिपोर्ट के बाद एक बार प्रदेश भर में एक संदेश गया है कि क्या सच में प्राइवेट अस्पताल इसी प्रकार से भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए शर्मिंदगी का कारण बनते रहेंगे ? उसके बाद इन अस्पतालों की निरंकुशता इतनी रहेगी कि जब उनसे एक मौत पर सवाल करने का समय माँगा जाएगा तो वो कभी वाराणसी में हूँ और कभी लखनऊ में हो की बात कर के समाज और मीडिया को गुमराह करते रहेंगे ?

इस से पहले चंदौली जनपद में स्वास्थ्य सेवाओ की पोल तब खुली थी जब एक सरकारी अस्पताल कमलापति में एक डाक्टर खुलेआम सुदर्शन न्यूज के कैमरे पर महिलाओं के आगे ही अभद्रता करते पाया गया था जिसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई . बताया ये भी जा रहा है कि यहाँ के मुख्य चिकित्साधिकारी महोदय चंदौली की इस चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था से बेहतर ढंग से परिचित हैं लेकिन वो मात्र परिचित भर हैं . उसके आगे कार्यवाही के नाम पर सीमा समाप्त हो जाती है .

चंदौली जनपद के CMO की सीमा समाप्त अवधारणा से वहां एक सरकारी ही नहीं बल्कि प्राइवेट अस्पताल भी परिचित हो चुके हैं और इसीलिए पंडित कमलापति अस्पताल के गालीबाज डाक्टर से आगे बढ़ कर आस्था अस्पताल ने तो मानवता पर ही वार कर दिया है.. वार्ड नम्बर 5 सैयदराजा निवासी एक महिला को उसके परिवार वालो ने एक आशा बहू के कहने पर प्रसव के लिए आस्था हॉस्पिटल में एडमिट कराया। आशा बहू ने सरकारी अस्पताल के बजाय आस्था अस्पताल की इतनी तारीफ क्यों की ये भी विचार करने का विषय है .

आरोप है कि यहाँ पर प्रशिक्षित डॉक्टरों के बजाय अप्रशिक्षित नर्स और वार्ड ब्वाय द्वारा पीडिता महिला का उपचार किया जा रहा था. पीड़ित परिवार वालो के कहने के बाद भी कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने तक नही आती है कि मरीज की स्थिति क्या है, इसी कारण डॉक्टर नर्स और वार्ड ब्वाय की लापरवाही के चलते महिला ने दम तोड़ इया है ..पीड़ित परिवार वालो ने डॉक्टर नर्स और वार्ड ब्वाय पर आरोप लगाया कि गंदा खून चढ़ाने की वजह से महिला की प्रसव के दौरान ही मौत हो गयी..

यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि प्रसव पूर्व मौतों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने तमाम योजनायें चला रखी हैं पर उन योजनाओं को चंदौली में लागू करना शायद कश्मीर में धारा 370 हटाने से भी ज्यादा मुश्किल काम है .. असल में सबकी जड में CMO महोदय की सीमा समाप्त वाली विचारधारा है . इसका प्रमाण है कि अभी तक पंडित कमलापति अस्पताल में गालीबाज डाक्टर अपने पुराने रुतबे से मौजूद है . फिर आस्था जैसे अस्पताल तो अच्छा ख़ासा ऊंची पहुच होने का दावा करते है .

इसी मामले में सबसे दर्दनाक पहलू तब तय जब मृतका के परिजनों के अनुसार मृतका की मौत से 10 मिनट पहले ही 25000 रुपया पीड़ित परिवार से जबरन ले लिया गया। पीड़ित परिवार वालो द्वारा स्थानीय थाना में हॉस्पिटल डाक्टर नर्स वार्ड ब्वाय पर लिखित तहरीर देकर मुकदमा पंजीकृत करवा दिया गया है। इस बिषय पर जब सीएमओ चन्दौली से वार्ता हुई तो उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में है जो दुःखद प्रकरण है और जल्द ही जांच करवा कर दोषी के ऊपर कठोर कार्यवाई की जाएगी।

यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि ये अस्पताल दुबे जी के अस्पताल के नाम से प्रसिद्ध है.. दुबे जी को बार बार सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होने इतना सामान्य जवाब दिया कि जैसे उनके मन में संवेदनशीलता ही नहीं बची . उन्हें पता भी नहीं है कि किसी का परिवार उजड़ गया है , बल्कि वो तो अपने नये मरीज की तलाश में हैं . अस्पताल के प्रबन्धक श्री दुबे जी ने मीडिया तक को समय नहीं दिया और मोबाईल नंबर 9451892690 पर फोन मिलाने पर वो खुद को कभी यहाँ कभी वहां बताते रहे .. वो भी तब जब CMO जांच करवाने की बात कह रहे हैं .

यहाँ पर इस अस्पताल के अन्दर गोरखपुर के BRD कालेज में मासूम बच्चो की मौत के बाद तय किये गये सरकारी मानको पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं . अग्निशमन उपकरण से ले कर जीवन रक्षक प्रणाली की उपलब्धता पर भी सवाल हैं कि वो पूरे हैं या नहीं . यहाँ कार्य करने वाले तमाम स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता और उनकी कार्यक्षमता भी सवालों के घेरे में आ चुकी है.. निश्चित रूप से CMO चंदौली महोदय व अन्य उच्चाधिकारी ने इन सभी विषयों और बिन्दुओ पर जांच करवाएंगे ऐसी अपेक्षा की जा रही है .

अगर इन तमाम बिन्दुओ की जाँच हुई तो निश्चित रूप से तमाम ऐसे सच निकल कर सामने आयेंगे कि अब तक वहां कितने लोगो का जीवन खतरे में डाला गया है और अब तक कितने लोग उस खतरे से निकल कर जीवित बच कर वहां से आ पाए हैं . सवाल ये है कि अभी ऐसे कितने अन्य अस्पताल चंदौली जनपद में चल रहे हैं जो सरकार द्वारा निर्धारित मानको पर खरे उतरेंगे ? अभी हाल में ही एक मरीज के पेट में तौलिया छोड़ देने की घटना भी ऐसे ही एक अन्य अस्पताल की थी..

लेकिन इसको भी अधिकारी महोदय की “सीमा समाप्त’ विचारधारा ने ज्यों का त्यों दबा दिया था . अब सवाल उठा है कि क्या इस मामले को भी ऐसे ही दबा दिया जाएगा ..? क्या दुबे जी बिना जवाब दिए ही बगल से निकल जायेंगे ? क्या अब जागेगा चंदौली का जिला प्रशासन और कार्यवाही करेगा ऐसे तमाम डाक्टरों और अस्पतालों पर जो सरकार शासन द्वारा निर्धारित मानको पर खरे नही हैं ? या फिर अंत में वही होगा जो अब तक होता रहा ? 

रिपोर्ट-

प्रशांत सिंह 

सुदर्शन न्यूज संवाददाता – जनपद चंदौली 

मोबाइल – 9264915248 

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