कहाँ से होती राष्ट्र की रक्षा जब वर्दी वालों के साथ था इतना भेदभाव. वो समय था अखिलेश यादव का और विभाग था UP पुलिस

एक वर्दी वाला जब अपनी वर्दी में होता है तो वो न ही किसी जाति का प्रतिनिधित्व करता है और न ही किसी मत या मजहब का . ठीक वैसे ही जैसे आज पाकिस्तान की कैद में विंग कमांडर अभिनंदन इन सभी अनावश्यक चीजो से ऊपर उठ कर सिर्फ और सिर्फ राष्ट्र के सपूत के रूप में जाने जा रहे हैं . ठीक वैसे ही पुलिस विभाग में जब कोई अधिकारी या कर्मचारी वर्दी पहन लेता है तब वो किसी मत या जाति का नहीं बल्कि उस प्रदेश का रक्षक होता है ..

जब किसी अन्याय से पीड़ित संकट में घिरा इन्सान पुलिस को बुलाता है तो उसकी वर्दी उस पीड़ित को अपनी रक्षा का एहसान दिलाती है .. शायद ही कोई उस वर्दी वाले का जाति आदि पूछता हो लेकिन जब इन्ही वर्दी वालों को जाति , मत , मजहब या अपनी राजनीति की संतुष्टि के लिए पदोन्नति या पदावनत किया जाता है तो कठोर वर्दी के नीचे उनके इंसानी हृदय को पीड़ा जरूर होती भले ही तमाम नियम , कायदे और कानूनों में बंधे होने के चलते वो कुछ कह नहीं पाते हों .

यद्दपि एक जिम्मेदार मीडिया होने के नाते हमारी जिम्मेदारी जरूर बनती है कि उन खामोश पुलिसकर्मियों की आवाज बना जाय . विदित हो कि अखिलेश यादव सरकार में लिए गये एक और फैसले को न्यायपलिका ने गलत और दोषपूर्ण बताया है . ये फैसला वर्दी वालों के विभाग में था जिसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सीधे सीधे जनता के हितों और समाज की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कहा जा सकता है . न्याय पालिका ने इसी के साथ उस समय के विपक्ष के तमाम आरोपों को भी पुष्टि कर दिया .

ध्यान देने योग्य है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में विगत समाजवादी पार्टी की सरकार के समय पर गलत तरीके से आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाए पुलिसकर्मियों को प्रमोशन देकर पदोन्नति के फैसले पर हाईकोर्ट ने गाज गिरा दी है। कई सीनियर इंस्पेक्टर सपा सरकार की प्रमोशन नीति के खिलाफ कोर्ट गए थे। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने सपा सरकार के वर्ष 2015 के आदेश को खारिज करते हुए 211 सीओ और 960 अन्य पुलिसकर्मियों को पुराने पद पर रिवर्ट करने का आदेश दिया है। इस आदेश को लेकर सरकार को दो माह में कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में सपा सरकार ने वर्ष 1994 में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का आदेश करते हुए कई पुलिसकर्मियों के प्रमोशन किए थे। इस दौरान आपत्ति लगाई गई थी तो सरकार ने स्पष्ट किया था कि ये प्रमोशन अस्थाई होंगे और अगले प्रमोशन के समय पूरे बैच के साथ प्रमोशन दिया जाएगा। वर्ष 2008 में पुलिस नियमावली बनाई और इसमें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन को जगह नहीं दी गई। यानी इस तरह के प्रमोशन को बंद कर दिया गया। सरकार को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश को दो माह में लागू करके रिपोर्ट कोर्ट में दें। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब  211 डिप्टी एसपी को रिवर्ट करके इंस्पेक्टर बनाया जाएगा। वहीं 960 दरोगा और दीवान का भी प्रमोशन वर्ष 2015 के आदेश के दायरे में हुए थे और अब इन्हें भी रिवर्ट किया जाएगा।

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