जय श्री राम न बोलने पर कार से टक्कर का आरोप लगाया था मौलाना ने.. पुलिस की जांच में बेनकाब हुए वो सभी चेहरे जो बदनाम कर रहे थे तमाम हिंदुओं को

एक बार फिर बेनकाब हुए हैं वो तमाम चेहरे जो न सिर्फ संगठनों बल्कि हिन्दू समाज को बदनाम करने के बहाने तलाशते रहते हैं. इन्होने पहले गुरुग्राम की एक घटना की आड़ में हिन्दू समाज को बदनाम करने का प्रयास किया था लेकिन जब उस घटना की सीसीटीवी फुटेज सामने आई तो इनकी कलई खुल गई. इन लोगों ने दिल्ली की एक घटना को भी ठीक गुरुग्राम के ही अंदाज में पेश किया तथा हिन्दुओं को निशाना बनाने का प्रयास किया लेकिन लेकिन पुलिस की जांच में इन लोगों का हिन्दुओं को बदनाम करने का एजेंडा एक बार पुनः असफल हो गया है.

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खबर के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने मदरसा शिक्षक के उस आरोप को खारिज कर दिया, जिसमें उसने जय श्री राम बोलने से मना करने पर कार से टक्कर मारने का आरोप लगाया था., पुलिस ने कहा है कि मदरसा शिक्षक पर कथित हमले का कोई सुराग नहीं मिला है. बता दें कि दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 20 इलाके में मदरसे के एक शिक्षक मोहम्मद मोमिन ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि गुरुवार (जून 20, 2019) को जब वो मस्जिद से निकलकर मदरसे के पास टहल रहा था, तो उसके पास कार सवार कुछ युवक पहुँचे और उन लोगों ने मोमिन से जय श्री राम का नारा लगाने को कहा.

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मोहम्मद मोमिन ने कहा था कि जब उसने ऐसा करने से से इनकार कर दिया तो गाड़ी में सवार लोगों ने उसे गालियाँ दी और फिर कार से टक्कर मारी. जैसे ही ये घटना मीडिया की सुर्खिया बनी तो हिन्दू विरोधी ताकतें एक बार फिर से सक्रिय हो गईं तथा धर्म के आधार पर मुस्लिमों को निशाना बनाये जाने की पुरानी थ्योरी दोहराते हुए हिन्दुओं को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 323 के तहत केस दर्ज करते हुए मामले में जाँच शुरू की.

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जानकारी के मुताबिक़ पुलिस ने इस मामले में घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला और शुरुआती जाँच के बारे में बताते हुए रोहिणी के डीसीपी एस डी मिश्रा ने कहा कि उन्होंने इस बारे में घटना के समय मौजूद चश्मदीद गवाह से बात की, जिसने उन्हें इस घटनाक्रम के पूरे सीक्वेंस को बताया. इससे मोमिन के आरोप साबित नहीं होते हैं. वहीं एक और पुलिसकर्मी ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर मोमिन के दावों की पुष्टि नहीं होती है, लेकिन जाँच जारी है. घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से भी आरोपों की पुष्टि नहीं होती है.

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