थम नहीं रहा SCST का विरोध.. एक्ट के विरोध में की गयी लोकसभा के सभी 543 सांसदों की तेरहंवी

SCST पर सवर्ण समाज का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है तथा नित नये तरीकों से इस एक्ट के विरोध में सवर्ण तथा ओबीसी समाज लामबंद है. मध्य प्रदेश के अशोक नगर में अनोखे तरीके से सवर्ण तथा ओबीसी समाज ने SCST का विरोध किया जहाँ लोकसभा के सभी 543 सांसदों की तेरहवी की गयी. आपको बता दें कि इससे पहले 14 सितंबर को सवर्ण तथा ओबीसी समाज के 500 से अधिक युवाओं ने मुंडन कराकर शहर में देश के 543 सांसदों की शवयात्रा निकाली थी जिसके बाद अब युवाओं ने देश के सभी सांसदों की शहर में तेरहवीं की, इसके लिए बकायदा गंगाजी पूजन किया और सांसदों को श्रद्धांजलि दी, साथ ही दो हजार लोगों को खाना भी खिलाया. इसके अलावा महिलाओं की वेशभूषा में युवाओं ने शहर में विलाप भी किया. युवाओं का यह विरोध प्रदर्शन शहर में लगातार पांच घंटे तक जारी रहा.

अशोक नगर के तुलसी पार्क में सवर्ण तथा ओबीसी समाज के युवाओं ने सांसदों की तेरहवीं का आयोजन किया. इसके लिए दो दिन पहले ही इन युवाओं ने शोकपत्र छपवाकर सभी सांसदों के परिवारों को आमंत्रित किया था. सोमवार को सुबह 11 बजे से तेरहवीं का कार्यक्रम हुआ और तेरहवीं की सभी रस्म कीं. मिनरल वाटर की बोतल रखकर गंगाजी पूजन किया और सभी सांसदों के नाम लिखे बैनर को रखकर श्रद्धांजलि भी दी. वहीं सब्जी पूड़ी बनवाकर गरीब परिवारों के दो हजार लोगों को खाना खिलाया गया. इससे शाम चार बजे तक तुलसी पार्क पर युवाओं का यह अनोखा विरोध जारी रहा. समिति के अमित रघुंवशी ने बताया कि तेरहवीं का कार्यक्रम पूर्ण करने के बाद भाजपा-कांग्रेस पार्टी को चेतावनी भी दी है कि अभी चुनाव को समय है, इसलिए चिंतन-मनन कर लें कि जिस तरह से 2007 में यूपी में बसपा की सरकार बन गई थी. उसी तरह से प्रदेश में भी ऐसे समीकरण न बन जाएं कि बाद में दोनों पार्टियों को पछताना पड़े.

अमित रघुवंशी ने सांसदों को भी चेतावनी दी कि सांसदों को उनकी मांग माननी चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वर्तमान सभी सांसदों के नाम के आगे 2019 में पूर्व सांसद लिखा जाए. युवाओं का कहना है कि अब इस एक्ट के विरोध में आगामी कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में होंगे. गांवों में चुनाव के लिए वोट मांगने पहुंचने वाले दोनों पार्टियों के नेताओं से ग्रामीण पूछेंगे कि आपने इस एक्ट के विरोध में पार्टी से सवाल क्यों नहीं पूछा और विरोध क्यों नहीं किया. इससे अब ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय और प्रादेशिक नेताओं को इन सवालों का सामना करना पड़ेगा.

Share This Post