दिल्ली में शुरू हुआ हिन्दुओ का पलायन.. “अल्ला कालोनी” घरों पर लिखे गये “मकान खाली है”. उधर से आई आवाज – “जा बुला ला जिसे बुलाना है” .. मौके पर सिर्फ “सुदर्शन न्यूज”

ये भारत की राजधानी है जो सबसे सुरक्षित होने के साथ साथ सबसे सजग प्रशासन और जागरूक जनता होने का दावा करती है . यहाँ की जनता ने खुद के तमाम नेतृत्व अधिकार आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल को सौंप दिए हैं और अरविन्द केजरीवाल की तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के चक्कर में वो पिस कर रह गए हैं . यहाँ दिल्ली में पलायन होने की खबर है जिस मौके तक सिर्फ और सिर्फ सुदर्शन न्यूज पहुंचा है और दिखाया है एक ऐसा सच जो आने वाले कल का एक आइना भी हो सकता है . वो आइना जहाँ न सिर्फ जनता ही बल्कि प्रशासन भी लाचार है कट्टरपंथ के आगे और शासन सिर्फ मूक दर्शक …  इस बार जहाँ की ये घटना है वहां शबनम नाम की एक महिला की खुली चुनौती वहां के लोगों के कानो में गूँज रही है की – “जा बुला ला जिसे भी तुझे बुलाना है ” .. 

ये मामला है दिल्ली के पूर्वी क्षेत्र में पड़ने वाले मंडावली कालोनी का . यहाँ की अल्ला  कालोनी जो  पूर्वी स्कूल ब्लाक मंडावली में स्थित है , में अब हिन्दुओ के घरों में पेंट से लिखे शब्द साफ़ देखे जा सकते हैं की ये मकान बिकाऊ है . उनका कहना है की वहां फ़ैल रहे कट्टरपंथ और उसको किसी कारणवश संरक्षण दे रहे पुलिस और प्रशासन के चलते वो वहां किसी भी हाल में नहीं रह सकते हैं और उन्हें अपना मकान आदि बेच कर किसी सुरक्षित स्थान पर जाना है . वहां इस प्रकार के हालत बनाये जा रहे हैं की कोई धार्मिक और सात्विक हिन्दू रह ही नहीं सकता . मकान बिकाऊ उन घरों के आगे भी लगा है जो वहां 40 वर्षो से रहते आ रहे हैं . 

स्थानीय निवासी बता रहे हैं की बीच आवासीय क्षेत्र में हिन्दुओ के घरों के आगे ही कुछ मुस्लिमों ने मांस की दुकाने खोल ली जिसके चलते दिन रात वहां से दुर्गंध उठने ले चलते वो स्थान रहने योग्य नहीं रह गया है . वहां शाकाहारी हिन्दुओ के घरों के बगल नालियों में जानवरो का बहता रक्त और सामने पड़ी बेहद भयभीत करने वाली हालत में हड्डियां एक आवासीय क्षेत्र को भयावह रूप दे रही हैं .. इतना ही नहीं जानवरों को काटने वाले खून से सने बड़े बड़े चाकू देख कर उनके बच्चे डर कर घरों में दुबके रहते हैं और कई बार तो सकड़ों पर उन मासूमो के आगे ही जानवरो की गर्दन रेती जा रही है जिनको तड़पते और छटपटाते देख कर न सिर्फ बच्चे बल्कि बड़े लोगों का दिल भी सिहर जाता है .. इस मामले में फ़िलहाल तथाकथित सेकुलर और बुद्धिजीवी खामोश हैं और फिलहाल स्वघोषित धर्मनिरपेक्षता के नियम को निभा रहे हैं . 

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