Breaking News:

रामजस विवाद पर बोले राष्ट्रपति, कैंपस में हो तार्किक बहस ‘हिंसा नहीं’…

नई दिल्ली : दिल्ली यूनिवर्सिटी में देशभक्ति पर मचे दंगल के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालयों में असहमति और बहस की स्वतंत्रता सोच की वकालत की है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि अशांति की संस्कृति का प्रचार करने के बदले छात्रों और शिक्षकों को तार्किक चर्चा और बहस में शामिल होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को अशांति और हिंसा के भंवर में फंसा देखना दुखद है। आपको बता दें कि राष्ट्रपति यहां छठे केएस राजामोनी मेमोरियल लैक्चर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी संविधान प्रदत्त सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से एक है।

लिहाजा, तर्कसंगत आलोचना और असहमति के लिए हमेशा स्थान होना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा देशव्यापी प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी समाज को महिलाओं और बच्चों के प्रति उसकी सोच की कसौटी पर ही परखा जाता है। भारत को इस कसौटी पर असफल नहीं होना चाहिए।

इसके साथ ही राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि वह ऐसी किसी समाज या राज्य को सभ्य नहीं मानते, अगर उसके नागरिकों का आचरण महिलाओं के प्रति असभ्य हो। उन्होंने कहा कि जब हम किसी महिला के साथ बर्बर आचरण करते हैं तो अपनी सभ्यता की आत्मा को घायल करते हैं। न सिर्फ हमारा संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा में भी नारियों को देवी माना जाता है।

उन्होंने कहा कि देश को इस तथ्य के प्रति सजग रहना चाहिए कि लोकतंत्र के लिए लगातार पोषण की जरूरत होती है। वहीं, राष्ट्रपति ने कहा कि जो लोग हिंसा फैलाते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि बुद्ध, अशोक और अकबर इतिहास में नायकों के रूप में याद किए जाते हैं न कि हिटलर और चंगेज खान।

सुदर्शन न्यूज को आर्थिक सहयोग करने के लिए नीचे DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW