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दिल्ली-एनसीआर में रोहिंग्याओं के हाथों में फोन और फोन में सिम.. किस ने दिए सिम लेने की ID, या सिम वाला भी उनका था ?

हिंदुस्तान को केंसर की तरह संक्रमित कर रहे रोहिंग्या आक्रान्ताओं को लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली एनसीआर से एक ऐसी जानकारी सामने आयी है जो होश उड़ाने वाली है. जानकारी मिली है कि दिल्ली एनसीआर में जो रोहिंग्या रह रहे हैं उनके पास खुद के मोबाइल फोन तथा मोबाइल नंबर हैं. जानकारी सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गये हैं कि आखिर किन कागजात तथा पते के आधार पर रोहिंग्याओं ने सिम खरीदा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सिम खरीदने के लिए रोहिंग्याओं को किसने कागजात उपलब्ध कराए या कहीं ऐसा तो नहीं सिम वाला ही उनका आदमी था?

वर्तमान में संसद और देशभर में असम के 40 लाख लोगों के एनआरसी में नाम ना आने को लेकर बेशक बहस छिड़ी है और बहस के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राज्यों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशियों को ऊपर कारवाई के लिए एडवाइजरी जारी करने करने का संसद में बयान दे चुके हैं, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमान बसे हुए हैं जो यहां पिछले 5 साल से लगातार झुग्गी डालकर रह रहे हैं. ये रोहिंग्या यहाँ निजी मालिक की जमीन पर किराया देकर झुग्गी बनाकर रह रहे हैं. अनुमान के मुताबिक़, 100 से ज्यादा रोहिंग्याओं के परिवार इन झुग्गियों में यहां रह रहे हैं.

झुग्गी बनाकर रह रहे रोहिंग्योओं के हाथों में उनके मोबाइल भी हैं और झुग्गियों में बाकायदा कूलर चल रहे हैं. झुग्गियों में गुजर बसर कर रहे यह रोहिंग्या मुसलमान यहां बिजली चोरी कर कूलर चला रहे हैं. हालांकि सरकार की तरफ से इन्हें कोई भी ऐसी सुविधा नहीं दी गई है, जिससे कि यह अपनी नागरिकता का भारत में दावा ठोक सकें. लेकिन फिर भी ये यहां पर अड़े हुए हैं. मोबाईल चला रहे रोहिंग्याओं पर सवाल उठता है कि आखिर उनके पास मोबाइल नंबर किस कागजात पर जारी किए गए. इस मामले में एसीपी अमन यादव का कहना है कि पिछले काफी दिनों से रोहिल्ला मुसलमान फरीदाबाद में रह रहे हैं और उनकी समय-समय पर जांच भी की जाती है. लेकिन जानकारी मिली है कि रोहिंग्याओं के पास मोबाइल आदि हैं तो इसकी जांच की जायेगी कि आखिर किसने और रोहिंग्याओं को अपनी ID पर मोबाइल नंबर दिलवाया?

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