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“भैया मैं तो जा रहा, पर अगर मुझे प्यार करते होंगे तो मेरी प्रिंसिपल जरीना कुरैशी को सज़ा जरूर दिलाओगे” ..और वो चला गया

मध्यप्रदेश में बदलाव की शुरुआत क्या यहीं से होनी थी ? जरीना कुरैशी से इतना तंग क्यों और कैसे हो गया वो मासूम जो ठीक से चल भी नही पा रहा था..क्या अब इस प्रकार की शिक्षा दी जाएगी मध्यप्रदेश के स्कूलों में जहाँ को मासूम खुद को खुद से ही खत्म करने पर आमादा हो जाये ?  गोटेगांव में एक 12वीं के छात्र निशांत विश्वकर्मा ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। बताया गया है की छात्र बोहानी में स्थित नवोदय विद्यालय में पढ़ता था, जो पैर से लाचार था। स्कूल के प्रिंसिपल से भी वो बहुत परेशान था।

पैर से लाचार होने की वजह से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन स्कूल में उसे ठीक इलाज नहीं मिल पा रहा था। इसलिए वो इलाज के लिए अक्सर स्कूल से घर जाता था। इस वजह से नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल ने उसे दो बार सस्पेंड भी कर दिया था। जिससे वो और ज्यादा परेशान हो गया। आत्महत्या करने से पहले भी वो इलाज के लिए घर आया था। यहां निशांत ने अपने घरवालों को स्कूल में मिल रही प्रताड़ना और बेहतर इलाज न मिल पाने का जिक्र किया।

प्रिंसिपल जरीना कुरैशी के बर्ताव को लेकर स्कूली बच्चों ने सड़क जाम कर दिया. बच्चों ने प्रिंसिपल पर बुरे बर्ताव का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है. गाडरवारा एसडीओपी सहित एसडीएम मौके पर पहुंच कर बच्चों को समझाया और सड़क जाम खुलवाया. इसके बाद परिजनों ने गोटेगांव में उसका इलाज कराया और फिर परीक्षा दिलाने के लिए वापस स्कूल जाने की तैयारी में जुट गए। लेकिन स्कूल जाने से पहले ही निशांत ने बीती रात ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।

मृतक के भाई के मुताबिक छात्र ने उसे फेसबुक पर मैसेज किया था जिसमें साफ लिखा था की “जरीना को छोड़ना नहीं भाई, आप प्यार ऐसे दिखला देना”.स्कूल की प्रिंसिपल जरीना कुरैशी से सम्पर्क किया तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से मना कर दिया .. जान देने से पहले निशांत ने अपने फेसबुक पेज पर दोस्तों और भाई से दिल की बात शेयर की। हालांकि जब तक परिजन उसके दिल का हाल समझ पाते, तब तक वो हमेशा के लिए खामोश हो गया। गोटेगांव पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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