आतंकियों के बाद नक्सलियों ने टेके घुटने.. 10 लाख के इनामी भूषण ने डाल दिए हथियार.. मौत के भय से

जम्मू कश्मीर में सीमा पर एकतरफ भारतीय सेना आतंकियों का खात्मा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ देश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए खतरा बने नक्सली भी अब भारतीय सुरक्षाबलों के शौर्य तथा पराक्रम के कारण घुटने टेक रहे हैं. नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे भारतीय सुरक्षाबलों तथा पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि या तो नक्सली हथियार त्याग कर सरेंडर कर दें, या फिर मरने के लिए तैयार रहें.

सुरक्षाबलों के इसी खौफ के कारण 10 लाख के इनामी कुख्यात नक्सली भूषण उर्फ़ चंद्रभूषण ने झारखण्ड की गुमला पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. ह बिहार व झारखंड राज्य के रिजनल कमेटी का सदस्य था. भूषण का आतंक गुमला, लातेहार व लोहरदगा जिले में था. उसके ऊपर इन तीनों जिला के विभिन्न थानों में 17 नक्सली घटनाओं में शामिल होने की प्राथमिकी दर्ज है. इसमें अधिकांश घटनाएं पुलिस पार्टी व पुलिस कैंप पर हमला करने की है.

जानकारी के मुताबिक़, गुमला के चंदाली स्थित पुलिस लाइन में भूषण यादव ने डीआईजी अमोल विनूकांत होमकर, डीसी शशि रंजन, एसपी अंजनी कुमार झा, एएसपी बीके मिश्रा, सीआरपीएफ-218 के टू-आईसी दाव किंडो, महेंद्र सिंह, गुमला एसडीपीओ नागेश्वर सिंह, बसिया एसडीपीओ दीपक कुमार, डीएसपी प्राण रंजन के समक्ष सरेंडर किया. मौके पर डीआईजी ने भूषण को 10 लाख रुपये का चेक दिया. डीआईजी ने कहा कि भूषण यादव अपने संगठन के कार्यों से नाखुश था. वह झारखंड पुलिस से सरेंडर करने के लिए संपर्क कर रहा था. इसके बाद गुरुवार को उसने खुद पुलिस के पास पहुंचकर सरेंडर किया है.

डीआईजी एवी होमकर ने कहा कि भूषण यादव ने सही समय पर सरेंडर कर दिया. उसे सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ मिलेगा. उसके ऊपर 10 लाख का इनाम था. उस राशि को उसे सौंप दिया गया है. सरकार की अन्य सुविधाओं का भी लाभ उसे मिलेगा. उन्होंने कहा कि जो भी नक्सली हथियार उठाकर घूम रहे हैं. उनसे अपील है कि सरेंडर कर दें. अगर सरेंडर नहीं करेंगे तो मारे जायेंगे. डीआईजी ने कहा कि सभी नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नयी दिशा शुरू की गयी है.

सरेंडर करने के बाद भूषण ने कहा कि वह अब मुख्यधारा में देश के लिए काम करना चाहता है. भूषण ने कहा कि नक्सलियों के बड़े कैडर के नेता ऐश-मौज कर रहे हैं. आलिशान घर बनवा रहे हैं. बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. लेकिन जो छोटे कैडर के सदस्य हैं. उनका शोषण हो रहा है. उनके बच्चे सरकारी स्कूल में भी नहीं पढ़ पा रहे हैं. उसने कहा कि संगठन में महिलाओं व बच्चों के साथ अत्याचार व शोषण हो रहा है. उसने अन्य सभी नक्सलियों से भी अपील की कि वो हथियार छोडकर सरेंडर करें तथा मुख्यधारा में लौट आयें.

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