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खुद मुस्लिम नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि कलाम नहीं थे मुसलमान

बिहार के बाद अब एक और धर्म आधारित विवाद सामने आया है। देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ा विवाद थमने का नाम

नही ले रहा है। बता दें कि अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनके गृहनगर पीकारुंबू में 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलाम की वीणा बजाते हुए लकड़ी

से बनी एक प्रतिमा का अनावरण किया था।

जिसमें कलाम की प्रतिमा के पास भगवद्गीता रखा गया था। इस प्रतिमा के अनावरण के बाद एक विवाद के साथ साथ राजनीति भी शुरू हो गई। जहां एक और

डीएमके नेता स्टालिन ने मोदी सरकार पर सांप्रदायिकता थोपने का आरोप लगाया, तो वहीं दुसरी ओर तमिलनाडु के तौहीद जमात के मुस्लिम नेता जैनुलबुद्दीन ने

कहा कि कलाम मुसलमान नही थे। मुस्लिम नेता ने कहा कि उनका नाम अब्दुल कलाम हो सकता है, लेकिन वो एक मुस्लिम नहीं थे।

उन्होंने कहा कि अब्दुल कलाम संतों की पूजा किया करते थे, इसलिए वे मुसलमान नही थे। गौरतलब हो कि भगवत गीता रखे जाने को लेकर विवाद को शांत

करने के लिए उनके परिवार ने प्रतिमा के पास कुरान और बाइबल की प्रति रखकर विवाद को शांत करने का प्रयास किया। जिसके बाद अब मुस्लिम नेता ने मांग

कर रहे हैं कि कलाम के पास भगवद्गीता ही रखें वहां कुरान शरीफ नहीं रखी जानी चाहिए।

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