1998 का वह परीक्षण जिसने दुनिया में भारत को बनाया परमाणु शक्ति संपन्न. जिसने अमेरिका समेत सभी देशों को कर दिया हैरान…..


नई दिल्ली : आज पोखरण परमाणु परीक्षण के पूरे 19 साल हो चुके है। प्रधानमंत्री मोदी ने पोखरण परमाणु परीक्षण की वषर्गांठ पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिखाए गए ‘साहस’ की आज प्रशंसा की। बता दें कि ये परीक्षणा इसलिए अहम था क्‍योंकि इसने पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को बदल कर रख दिया था। 
उस दिन दुनिया ने समझा कि भारत तेजी से उभरती ताकत है और ये भी कि कोई सैटेलाइट उसके मंसूबों को भांप नहीं सकती। खबरों के मुताबिक भारत ने परमाणु परीक्षण की तैयारी इतनी गोपनीयता और कुशल रणनीति के साथ की थी कि अमेरिकी सैटेलाइट भी गच्चा खा गए थे। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों समेत गिने-चुने लोगों को ही इसकी जानकारी थी, लेकिन सभी ने अपना काम बड़ी कुशलता से किया था। इस टीम के अलावा सरकार के कई वरिष्‍ठ अधिकारियों, मंत्रियों तक को इसका पता नहीं था। 
परमाणु परीक्षण के लिए भारत ने पूरी गोपनीयता बरती थी। वर्ष 1995 में ऐसे ही एक प्रयास का अमरीकी जासूसों ने पता लगा लिया था और दबाव में भारत को अपना परीक्षण टालना पड़ा। इस बार भारत कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था। परीक्षण स्थल का कलाम और उनकी टीम ने कई बार दौरा किया। इसके लिए कलाम के साथ आर चिदंबरम व अनिल काकोडकर ने मुख्य भूमिका निभाई। ये लोग कई माह तक इस क्षेत्र में सैन्य अधिकारी के रूप में घूमते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं पड़ी।
कलाम को मेजर जनरल पृथ्वीराज और चिदंबरम को मेजर जनरल नटराज और काकोडकर को भी एक अन्य मेजर जनरल की वर्दी पहनाई गई। कलाम ने बाद में कहा कि दुनिया को गच्चा देने को हमने पूरी तैयारी की और एक साथ कई एजेंसियों ने मिलकर बेहतरीन काम किया।  वहीं, परमाणु परीक्षणों के दौरान पोखरण के लोगों की भूमिका की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षणों की योजना बनाने और उन्हें करने के दौरान चुप्पी साधे रखने के लिए पोखरण के लोगों की भी तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्र के हित को तरजीह दी।   

सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share