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मुख्यमंत्री जता रहा है जवानों के हथियारों की मौत का शौक. और हां, यह खबर कश्मीर की नहीं है…

भारतीय सेना के 18 जवानों पर गोली चलाने वाले आतंकी एसएस खापलांग की मौत पर नागालैंड के मुख्यमंत्री शुर्होजेली लीजीत्सु ने शोक जताया है। शुर्होजेली लीजीत्सु ने कहा कि एसएस खापलांग की मौत से मैं शोक संतप्त हूं। ये दुखद है कि खापलांग जैसे इतने महत्वपूर्ण नागा नेता हमारे बीच नहीं रहे, वो भी ऐसे वक्त पर जब लंबे समय से चली आ रही नागा राजनीतिक समस्या सुलझने के कगार पर है। ज़रूरत है कि सभी नागा राजनीतिक संगठन एक साथ आएं और भारत सरकार के सामने अपनी बात रखें। 

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उन्होंने कहा कि खापलांग ने अपनी पूरी जिंदगी नागा लोगों के नाम समर्पित कर दिया और अब वक्त आ गया है कि सभी नागा लोग पूरे नागा परिवार की शांति, सदभाव और उनकी भलाई के खुद को समर्पित कर दे। बता दें कि खापलांग, प्रतिबंधित नागा आतंकी संगठन एनएससीएन-के का प्रमुख था जिसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से म्यांमार में हुई। 1997 में भारत सरकार के साथ खापलांग ने युद्धविराम का समझौता किया लेकिन 28 मार्च 2015 में इसे रद्द कर दिया। 

खापलांग के संगठन एनएससीएन-के ने 4 जून 2015 को घात लगाकर हमला किया था जिसमें 18 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इस घटना के बाद सितंबर 2015 को सरकार ने संगठन के साथ किसी भी तरह की बातचीत बंद कर दी थी और एनएससीएन-के को पांच सालों के लिए गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया था। 80 के दशक में खापलांग का संगठन कई गतिविधियों में शामिल था, जिसमें भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले, जबरन वसूली और लूट जैसे मामले शामिल हैं। 
खापलांग 1964 में नागा राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़ा और एनएससीएन का गठन करने वाले प्रमुख लोगों में से एक था। वर्ष 1988 में खापलांग एनएससीएन (आईएम) नेताओं इसाक चिशी स्वू और थुइंगलेंग मुइवा से मतभेदों के चलते अलग हो गया और अपना गुट एनएससीएन-के बना लिया। खपलांग और केंद्र सरकार के बीच 1997 में संघर्ष विराम हुआ, लेकिन 28 मार्च 2015 को यह निरस्त हो गया।
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