डा. हुसैन अहमद खान ने क्लिनिक खोली थी इलाज के लिए नहीं, बलात्कार के लिए

समाज में डॉक्टर और मरीज का रिश्ता सबसे पवित्र माना जाता रहा है.मरीज अपने डॉक्टर की सलाह पर आँख मूंदकर भरोसा करता है और डॉक्टर को भी पेशागत

ईमानदारी के साथ-साथ मरीज के विश्वास की कसौटी पर खरे उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहिए. डॉक्टर और मरीज के बीच का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है

कि दोनों एक दूसरे से कुछ नहीं छिपा सकते.एक-दूसरे को सब कुछ खुलकर बताने के ये सम्बन्ध ही परस्पर विश्वास की डोर को दिन-प्रतिदिन मज़बूत बनाते हैं.

एकाएक ऐसा क्या हो गया कि जीवन देने वाला डॉक्टर रक्षक से भक्षक
बन गया. एक ऐसा ही मामला धानेपुर थाना क्षेत्र के बड़कागांव विशंभर पुर की एक नाबालिक छात्रा का है. छात्रा कस्बा धानेपुर के ही एक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे

डाक्टर के यहां बुधवार को दोपहर में दवा कराने अपने परिजनों के साथ आई थी.आरोप है कि चेकअप के बहाने डॉक्टर एकांत में कमरे में ले गया और छेड़छाड़

करने लगा.इस पर किशोरी ने विरोध किया और गुहार लगाई जिस पर डाक्टर बाहर आ गया तब तक बाहर बैठे परिजन भी पंहुच गये जिस पर किशोरी ने आपबीती

बताई. जानकारी होने पर परिजनों की सूचना पर पंहुची डायल 100 पुलिस ने डाक्टर को अपने गिरफ्त में लेकर थाने में सौंप दिया है.

समाज में आ रहे इन

सामाजिक-आर्थिक बदलावों,टीवी-फिल्मों और घर-घर में मौजूद इंटरनेट से मिले खुलेपन,समाज में बढ़ते आपसी अविश्वास,धार्मिक-जातिगत खाइयों के चौड़े होने तथा

मानसिक-सांस्कृतिक पतन के कारण संबंधों की पतली परन्तु मज़बूत डोर भी तार-तार हो रही है. अब बदलते परिवेश और सोच के इस वातावरण में डॉक्टरों को भी

अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरुरत है वरना वह दिन दूर नहीं जब कोई महिला मरीज या तो किसी पुरुष डॉक्टर के पास इलाज के नहीं जायेगी और जाना भी

पड़ा तो वह डॉक्टर के केबिन में अपने साथ किसी रिश्तेदार को लेकर जायेगी. हो सकता है भविष्य में ऐसी उपचार विधि या मशीन बनानी पड़े जिससे डॉक्टर

अपने मरीज को छुए बिना ही इलाज कर सकें.

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