वो किसान नहीं, कोई और थे जो महाराष्ट्र में पुलिस की गाड़ी फूंक रहे थे…. जानिए वो कौन थे

महाराष्ट्र में हुए किसान आंदोलन को लेकर ऐसे नए खुलासे हुए हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। जहां एक ओर भूमाफियाओं के खिलाफ जंग छिड़ी हुई है, सुरदर्शन न्यूज भी भूमाफियाओं के खिलाफ लगातार कदम उठा है और उन्हें सबके सामने ला रहा है। वहीं, ऐसा खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र में किसान आंदोलन के पीछ भूमाफियाओं का हाथ है। भूमाफियाओं ने अपना काम करने के लिए किसानों की आड़ में बवाल काटा, जिससे किसानों का आंदोलन और उग्र हो गया। 
जानकारी के मुताबिक, मुंबई से सटे ठाणे जिले के कल्याम स्थित नेवाली गांव में नौसेना की जमीन को कुछ भूमाफियाओं ने बेचना शुरू कर दिया है। ब्रिटिश शासनकाल में द्वितिय विश्वयुद्ध के दौरान नेवाली सहित 18 गांवों की 650 एकड़ जमान अधिग्रहीत कर ली गई थी, अब इस जमीन के मालिकाना हक के लिए किसानों की चौथी पीढ़ी संघर्ष कर रही है। पुलिस के मुताबिक, आंदोलन को हिंसक करने के पीछे इन ही माफियाओं को हाथ है। 
इसी के चलते गुरुवार को किसानों का आंदोलन और उग्र हो गया, जिसमें पुलिस अधिकारी समेत एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके साथ ही पुलिस वैन सहित कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया था। इस मामले की जांच कर रहे डीसीपी ने बताया कि हिल लाइन में तीन और मानपाड़ा पुलिस थाने में आधी रात को आंदोलनकारियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके बाद आधी रात को ही नेवाली गांव में उन आरोपियों के खिलाफ कोंबिंग ऑपरेशन चलाया गया। 
इस बीच किसानों ने पुलिस पर आरोप लगाए कि उन्होंने पुलिस ने जबरन उनके घरों और गाड़ियों के कांच तोड़ दिए, जबकि डीसीपी भारद्वाज ने कहा कि संदिग्धों की धरपकड़ के लिए आपरेशन चलाया गया लेकिन किसी का कोई नुकसान नहीं किया गया। वहीं, आंदोलन के दौरान घायल हुए रिजर्व पुलिस बल के जवान सोमनाथ पाखरे ने बताया कि उस दौरान स्थल पर जवानों का बंदोबस्त किया गया था और उन पर 19 राइफल को संभालने की जिम्मेदारी थी। तभी वहां करीब 50 से 0 लोग आ गए और उन पर और पुलिस बैन का ड्राइवर मुतार तड़वी और सब इंस्पेक्टर पर लोहे की रोड से हमला कर दिया और बैन में आग लगा दी। उन लोगों ने तड़वी को आग में फेंकने की कोशिश की लेकिन वो किसी तरह से बच गए। 
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