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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, सबसे घटिया और अवांछनीय तरीका है तीन तलाक

नई दिल्ली : तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई जारी है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं में तीन तलाक को ‘वैध’ बताया गया हो, लेकिन यह शादी खत्म करने का सबसे घटिया और अवांछनीय तरीका है।

बता दें कि चीफ जस्टिस जीएस खेहर की अगुवाई में 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच ट्रिपल तलाक मामले में सुनवाई कर रही है। शुक्रवार को सुनवाई का दूसरा दिन था। सुनवाई के दौरान सीनियर वकील राम जेठमलानी भी तीन तलाक की एक पीड़िता की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है। किसी भी तरीके से इसकी वकालत नहीं की जा सकती।

कोई भी कानून ये इजाजत नहीं देता कि पति की इच्छाओं को पूरा करने के लिए पत्नी को पूर्व पत्नी बना दिया जाए। इसे तो गैर-संवैधानिक ही माना जाना चाहिए। जेठमलानी ने दावा किया कि वो बाकी मजहबों की तरह वो इस्लाम के भी छात्र हैं। उन्होंने हजरत मोहम्मद को ईश्वर के महानतम पैगंबरों में से एक बताया और कहा कि उनका संदेश तारीफ के काबिल है।

जेठमलानी ने आगे कहा कि कुरान कहती है कि आप अगर ज्ञान की तलाश में हैं तो अल्लाह की राह पर हैं। एक ज्ञान के साधक की स्याही शहीद के खून से ज्यादा महान है। वहीं, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि वह पहले यह निर्धारित करेगा कि क्या यह परंपरा इस्लाम के मौलिक तत्वों में है।

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