भजन गाने पर शमशाद को वतन छोड़ देने का फरमान.. कहाँ गये धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार ?

मुहम्मद शमशाद उसी धर्मनिरपेक्षता को मानता था जिसकी चर्चा राजनैतिक गलियारों में होती है. वह इंसानियत को मानता था, सर्वधर्म समभाव को मानता था. और इसी कारण उसने सावन के महीने में भगवान महादेव का बोल बम भजन गाया था. शमशाद का बोल बम गाना मजहबी कट्टरपंथियों को रास नहीं आया. इसके बाद शमशाद को धमकी मिल रही है कि या तो वह माफी मांगे या फिर जगह छोड़ दे. इससे वह दहशत में आकर शमशाद ने गांव छोड़ दिया है.

मामला झारखंड के गिरिडीह का है. आपको बता दें कि गावां थाना के सामने स्थित मस्जिद के बगल में शमशाद का परिवार रहता है. शमशाद ने सावन महीने में शिव की महिमा पर आधारित धार्मिक गीत गाया था. इसपर अंजुमन के सदर असगर अली व उसके बेटे जुनैद ने धमकी देते हुए भविष्य में भक्ति गीत नहीं गाने का फरमान जारी किया. इसके बाद शमशाद के परिवारवालों पर भी दबाव बनाया गया. आरोप है कि दोनों ने शमशाद की मां जैबुन निशां को हत्या की धमकी भी दी. शमशाद के पिता कमरुद्दीन अंसारी पटना में एक होटल में काम करते हैं.

शमशाद का कहना है कि दबाव बढ़ने पर उसके पिता डरकर इस बार मुहर्रम में अम्मी को अपने साथ पटना ले गए तथा वह भी गांव छोड़कर भाग गया है. एक वीडियो भेजकर उसने अपनी आपबीती सुनाते हुए सुरक्षा की मांग की है. वीडियो में युवक का कहना है कि वह आजीवन भक्ति गीत गाना चाहता है. अगर वह बोलबम गया तो क्या गलत किया. उसने कहा है कि माना अवः मुसलमान है लेकिन उसने भजन गाकर गुनाह नहीं किया है. उसने अपनी तथा आपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है.

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