ताश के पत्ते जैसी ढह रही DMK पार्टी श्रीराम विरोधी करूणानिधि की मौत ले बाद.. सामने आयी के बड़ी कलह

सनातन के आराध्य, हिन्दुस्तान की पहिचान प्रभुश्रीराम के विरोध की राजनीति करने वाले DMK नेता करूणानिधि की मौत को 15 दिन भी नहीं हुए हैं लेकिन DMK ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी है. DMK के अंदर तलवारें खिच गयी हैं तथा करूणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी तथा छोटे बेटे एमके स्टालिन एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं. एम. करुणानिधि के निधन के बाद उनके उत्ताधिकार को लेकर दोनों बेटों एमके स्टालिन और अलागिरि के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं. करुणानिधि ने एमके स्टालिन को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था. लेकिन उनके जाने के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की बागडोर किसके हाथ में होगी, इसे लेकर अलागिरि ने बड़ा बयान दिया है.

करूणानिधि के बेटे तथा स्टालिन के बड़े भाई एमके अलागिरि का दावा है कि डीएमके कैडर का समर्थन उनके साथ है. लिहाजा वही पिता की विरासत संभालेंगे. एमके अलागिरि ने कहा, ‘स्टालिन डीएमके कार्यकारी अध्यक्ष हैं, लेकिन वह काम नहीं कर रहे हैं.’ उन्होंने दावा किया, ‘डीएमके का नेतृत्व करने करने के लिए मैं ही राइट च्वॉइस हूं. जिस तरह से स्टालिन पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं; वो कितना गलत है, ये आने वाला वक्त बताएगा.’ स्टालिन को अयोग्य करार देते हुए अलागिरि ने कहा, ‘पार्टी में चीजें सही तरीके से नहीं चल रही हैं. इन दिनों डीएमके में जो भी हो रहा है. मैं उससे खुश नहीं हूं. पार्टी कैडर भी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं. पूरा कैडर मेरे साथ है. कैडर ने कई मौकों पर ऐसे संकेत भी दिए हैं कि उनका समर्थन मेरे साथ है.’

एमके अलागिरी से जब पूंछा गया कि क्या DMK आप दो भाइयों के कारण टूट सकती है तो अलागिरी ने कहा कि नहीं टूटेगी क्योंकि DMK का पूरा कैडर मेरे साथ है. अलागिरि ने यह भी कहा कि उन्होंने इससे पहले इस बारे में सार्वजनिक तौर कुछ नहीं कहा, क्योंकि करुणानिधि ने हिदायद दी थी कि वह स्टालिन के बारे में कुछ न बोले. अलागिरि ने कहा कि डीएमके बुरे दौर से गुजर रही है. इसे संभालना बेहद जरूरी है. एक अच्छा नेतृत्व ही ऐसा कर सकता है और अच्छा नेतृत्व में हूँ स्टालिन नहीं. जब DMK की बैठक हुई तो उसमें स्टालिन को नेता माना गया इस अधारा पर कहा जा रहा है अब अलागिरी तथा स्टालिन के बीच DMK बिखर जायेगी क्योंकि DMK कैडर में स्टॅलिन ही नहीं बल्कि अलागिरी भी पैठ रखते हैं.

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