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निर्णय अटल हों तो सब होते हैं सहमत.. उलेमा बोले- “सही है, सड़क पर बंद हो नमाज”

कहा जाता है कि अगर आपके अंदर निर्णय लेने की इच्छाशक्ति मजबूत है तथा आप इन निर्णयों पर अटल रहते हैं तो हर किसी को उससे सहमत होना पड़ता है. इसकी बानगी उस समय देखने को मिली है जब देवबंदी उलेमा ने सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें सड़क पर नमाज न पढने के आदेश जारी किये गये हैं. उलेमा का कहना है कि ये सरकार का एक अच्छा कदम है, इसका स्वागत होना चाहिए. चाहे हिंदू हो या मुसलमान, दोनों को ही सड़क पर कोई भी धार्मिक आयोजन नहीं करना चाहिए.

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देवबंदी उलेमा का ये बयान इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि जब जब किसी संगठन आदि ने सड़क पर नमाज का विरोध किया है तो इस्लामिक मौलाना/मौलवी उसके खिलाफ खड़े हो जाते थे तथा जबरन सड़क पर नमाज पढ़ते थे. लेकिन योगी सत्ता के प्रशासन के सड़क पर नमाज के आदेश को देवबंदी उलेमाओं ने स्वीकार करने की बात कही है. बता दें हाल ही उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि न तो सड़क पर न तो नमाज पढी जायेगी और न ही अन्य किसी तरह का धार्मिक आयोजन किया जायेगा.

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अलीगढ़ जिला प्रशासन के इस आदेश पर देवबंदी उलेमा ने कहा है कि एम अलीगढ़ ने जो अपना बयान जारी किया है, उसमें कहा कि सड़क पर कोई भी धार्मिक काम नहीं होगा, जैसे नमाज पढ़ी जाती है, या हमारे हिंदू भाई कोई और प्रोग्राम करते हैं. तो हम डीएम साहब के इस आदेश का समर्थन करते हैं. इत्तेहाद उलेमा ए हिन्द के उलेमा मुफ्ती असद ने आगे कहा कि इस वक्त में मुल्क के हालात ऐसे हैं कि कुछ फिरका परस्त लोग देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं. सड़क पर कोई भी धार्मिक काम या कोई हमारे हिंदू भाई प्रोग्राम करते हैं और फिरका परस्त उसको बिगाड़ने का काम करते हैं. तो उससे मुल्क का माहौल खराब होता है. तो डीएम साहब ने जो आदेश जारी किया है हम इसका समर्थन करते हैं

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