सरकार और शरिया आमने सामने… मामला मदरसे का

देश के संविधान को, लोकतंतंत्रिक ढाँचे को किस तरह से कुचला जाता है, चुनी हुई सरकार के फैसले की किस तरह धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है इस्लामिक उलेमाओं का वो बयान जोसमें उन्होंने चुनौती दी है योगी सरकार के उस फैसले को जिसमें कहा गया है कि अब उत्तर प्रदेश के मदरसों में कुर्ता पाजामा नहीं पहना जा सकेगा बल्कि अन्य स्कूलों की तरह पेंट शर्ट पहिनना होगा. इस्लामिक उलेमाओं ने साफ़ कर दिया है कि वह सरकार के इस फैसले को नहीं मानेंगे क्योंकि ये शरीयत के खिलाफ है तथा उनके लिए शरीयत से बड़ा कुछ नहीं है.

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों के लिए जल्द ही ड्रेस कोड लागू होने वाला है. उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रज़ा ने कहा है कि यूपी के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए जल्द ही ड्रेस कोड लागू किए जाएगा. इस ड्रेस कोड के तहत मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे कुर्ता पायजामा नहीं पहन पाएंगे बल्कि सरकारी और प्राइवेट स्कूल के छात्रों की तरह उनके लिए भी स्कूल की ख़ास ड्रेस होगी. रज़ा ने कहा कि मदरसा छात्र कुर्ता-पायजामे की जगह पेंट शर्ट पहिनकर कर आएंगे, यह अभी तय नहीं है और इस पर बैठकर विचार किया जाएगा. रज़ा के मुताबिक़ ये फ़ैसला मदरसों में आधुनिकीकरण के लिए किया गया है और इससे शिक्षा के स्तर में भी सुधार आएगा.

योगी सरकार के इस फैसले पर इस्लामिक उलेमा ने एतराज जताया है. ठाकुरद्वारा के शहर इमाम मौलाना मुहम्मद राशिद रज़ा ने कहा कि मदरसों में ड्रेस कोड को लागू करना शरियत की तौहीन है. उन्होंने कहा कि सरकार के उन आदेशों को ही माना जाएगा जो शरियत में दखल नहीं दे रहे. उलेमा ने कहा कि मामले में 11 जुलाई को लखनऊ में मीटिंग है. जिसके बाद आगे कोई फैसला लिया जाएगा लेकिन ये तय है कि शरीयत के खिलाफ वह किसी भी कानून को नहीं मानेंगे.


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