योगी आदित्यनाथ का किसानों के लिए काम करना अखिलेश का नहीं आ रहा रास, कर्जमाफी का बताया धोखा

लखनऊ : यूपी की सत्ता संभालने के 16 दिन बाद योगी सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग हुई। कैबिनेट बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। योगी सरकार ने किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ करने का फैसला लिया। इससे राज्य के 86 लाख किसानों को लाभ होगा। इससे सरकार पर 36 हजार करोड़ का भार पड़ेगा। कैबिनेट के अहम फैसलों में मोदी ने ज्यादातर छोटे किसानों को राहत दी है जिसमें 80 लाख मीट्रिक टन गेंहू खरीदेगी योगी सरकार।

5000 गेहूं खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें मुख्यमंत्री द्वारा मॉनिटर किया जाएगा। समर्थन मूल्य का पैसा सीधा किसानों के खाते में जाएगा और बिचौलिए खत्म होंगे। इसके साथ ही योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते रहेंगे। अवैध खनन पर रोक के लिए केशव प्रसाद मौर्या की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह बनाया गया है। एक हफ्ते में रिपोर्ट आएगी फिर कार्रवाई शुरू होगी।

योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में एंटी रोमियो दस्ते के काम की जमकर सराहना की गई। योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में योगी सरकार के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि सरकार के 16 दिन के भीतर यूपी के कुल 26 अवैध बूचड़खानों को बंद किया गया। योगी सरकार ने साफ किया कि अवैध बूचड़खाने नहीं चलेंगे। इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के दिशा निर्देशों का सरकार पालन करेगी।

वहीं, अब योगी सरकार द्वारा किसानों के लिए किए गए रास नहीं आ रहे हैं इसीलिये तो साप और कांग्रेस इसे धोखा बता रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि वादा पूर्ण कर्जमाफी का था, किसी सीमा का नहीं। एक लाख की सीमा से करोड़ों किसान ठगा महसूस कर रहे हैं। ये ग़रीब किसानों के साथ धोखा है। कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश सरकार के किसान कर्ज माफी के फैसले को ‘अधूरा वादा’ बताया और कहा कि पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किसानों से किए वादे पूरी तरह से पूरे करने चाहिए।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि किसान पूरी ऋण माफी से ही अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसानों पर 92,241 करोड़ रुपये का कुल कर्ज है और सरकार ने केवल 36 हजार करोड़ का फसल ऋण माफ किया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा ने इस कदम की घोषणा करके किसानों को केवल ‘बेवकूफ’ बनाया है।

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