शरिया अदालत पर भले छाई थी चुप्पी लेकिन हिन्दू अदालत पर बोल पड़ी अदालत और सरकार को जारी कर दिया नोटिस

कुछ समय पहले जब ऑल इंडिया मुसस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश में शरिया अदालतें खोलने की घोषणा की तो न सिर्फ तमाम राजनेताओं तथा तथाकथित बुस्द्धिजिवियों ने उसका समर्थन किया बल्कि जायज भी बताया. इसके बाद शरिया अदालतें खोली भी जा चुकी हैं. इस मजहबी कट्टरवाद को जवाब देने के लिए हिन्दू संगठन भी सामने आये तथा एलान कर दिया कि अगर मुसस्लिम समुदाय शरिया अदालत खोलेगा तो हम  भी हिन्दू अदालत खोलेंगे. इसके बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ में हिन्दू संगठन द्वारा पहली हिन्दू अदालत खोलने का एलान कर दिया. जैसे ही हिन्दू खोलने का एलान हुआ कट्टरपंथी तथा सेक्यूलर लोग चीख उठे तथा हिन्दू अदालत के खिलाफ पहुँच गये हाईकोर्ट.

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त हो गया है तथा योगी सरकार से जवाब माँगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे मुस्लिम शरिया कोर्ट के ही तर्ज पर हिंदू संगठनों द्वारा हिंदू कोर्ट का गठन किया गया है.  यह कोर्ट ठीक उसी तरह अस्तित्व में आई है जैसा कि इस्लामिक शरिया अदालतों का ट्रिपल तलाक, हलाला तथा महिलाओं के हक का विरोध करने को लेकर आना हुआ था. जिस क्षेत्र में इस कोर्ट का गठन किया गया है वहां के स्थानीय वादों का इसी कोर्ट से निस्तारण किया जायेगा और तो और इस हिंदू कोर्ट का जज डॉ. पूजा पांडेय को बनाया गया है. हाईकोर्ट में बताया गया है कि हिन्दू अदालत का गठन नहीं है तथा खतरा पैदा करने वाला है व न्यायपालिका को चुनौती देने वाला है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर चीफ जस्टिस डी.बी.भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने मामले सुनवाई शुरू की तो याचिका में हिंदू कोर्ट के गठन को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया. हालांकि मामले में हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स को साक्ष्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया है. लेकिन, मामले को संज्ञान में लेते हुए तथा कथित रूप से हिंदू कोर्ट की पहली जज पूजा शकुन पाण्डेय व डीएम मेरठ को इस प्रकरण में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है.  साथ ही इनका पक्ष रखने के लिये नोटिस जारी किया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी. सुनवाई पर राज्य सरकार को भी अपना जवाब दाखिल करना होगा.

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