शायद खुद को क़ानून से ऊपर समझ रहा था सहारनपुर का जावेद, जिसे रास नहीं आई जनकपुरी पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा

इस खबर को पढ़ कर आप खुद ही समझ जाएंगे कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यस्था को पहले पटरी पर लाने व उसके बाद उसको पटरी पर बनाये रखने के लिए कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों को किस प्रकार से न सिर्फ आतंकियों / अपराधियो की गोली तक का सामना करना पड़ रहा है अपितु उन पुलिस के जवानों को समाज मे छिपे तथाकथित सफेदपोशों व नकली रौबदार व्यक्तियों से भी पार पाना पड़ रहा है ..

मामला है उत्तर प्रदेश के सीमांत जिले सहारनपुर का..यहां जावेद नाम के एक व्यक्ति ने खुद को शायद कानून से ऊपर समझने की भूल कर ली थी क्योंकि उसके द्वारा चलाये जा रहे वाहन का कागज़ात उसके पास लम्बे समय से नहीं था .. न जाने किस रौब व धौंस में उसने बिना पूरे वैध कागज़ के लंबे समय तक वाहन चलाया और जब उसकी इस हरकत पर पुलिस ने उसका चालान किया तब उसने एक नहीं, दो नहीं बल्कि पूरे जनकपुरी थाने को अपने आरोपों की लिस्ट बना कर लपेट लिया ..उसके अनुसार स्थानीय थाना किसी सोची समझी साजिश के तहत ये कार्यवाही कर रहा है लेकिन इतनी लंबी बयानबाजी के बजाय उसने अपने वाहन के कागजात सही करवाने की चिंता नहीं की ..

आरोप लगाने वाले जावेद ने मज़हबी कार्ड खेलते हुए कहीं न कहीं तुष्टिकरण का खेल भी खेलने की कोशिश की जिस से स्थानीय थाना पुलिस बिल्कुल भी अप्रभावित रही और उन्होंने वही किया जो न्यायोचित था ..जावेद पहले भी पुलिसकर्मियों की वीडियो आदि बनाने के लिए जाना जाता है ..प्रथम दृष्टया ये मामला कर्तव्यनिष्ठ पुलिस वालों को बदनाम कर के स्थानीय प्रशासन को अपने दबाव में लेने की एक सोची समझी साजिश के रूप में सामने आ रहा है जो किसी भी समाज के लिए कहीं से भी किसी भी प्रकार से उचित नहीं होता ..आरोप लगाने वाले जावेद मकान ¨लक रोड पर है। घर के नीचे ही बाइक मिस्त्री की दुकान व पान का खोखा है। जावेद के आरोपों की लंबी लिस्ट में अपनी तेजतर्रार छवि के लिए प्रसिद्ध दारोगा सुभाष,  दो सिपाही व इंसपेक्टर जनकपुरी शैलेंद्र कुमार शर्मा भी आ गएजबकि ये सभी अधिकारी अपने थानाक्षेत्र में शांति , सौहार्द स्थापित करने के लिए अपने अथक परिश्रम के लिए जाने जाते हैं ..

स्थानीय पुलिस प्रशासन से जब सुदर्शन प्रतिनिधि ने बात की तो पता चला कि पुलिस ने किसी भी प्रकार से कोई भी ऐसा कार्य नही किया जो कानून के दायरे से बाहर हो व न्याय की सीमाओं से परे हो ..यद्द्पि जावेद ने अपने बिना कागज़ के वाहन के चालान को इतना बड़ा विषय क्यों बना दिया ये समझ के बाहर की बात है ? क्या वो स्वयं को स्थानीय पुलिस से मुक्त रखना चाहता है ? यदि उसके वीडियो पर  दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्यवाही होती है तो उसकी गलती पर उसके खिलाफ कार्यवाही क्यो न हो ? क्या अपने बनाये उस वीडियो को वो सदा और आगे भी एक ढाल के रूप में प्रयोग करता रहेगा अपनी तमाम कमियों को छिपाने के लिए ? यद्द्पि इस मामले में सहारनपुर पुलिस खास कर जनकपुरी पुलिस का धैर्य सराहनीय है जिन्होंने अपने ऊपर लगे ऐसे तमाम आरोपों पर विचलित होने के बजाय अपने कार्य जिसमे समाज की शांति व सुरक्षा है, को प्रमुखता दी और उस पर अग्रसर भी है ..लेकिन यहाँ जनमानस को समझने की जरूरत है कि यथासम्भव कोशिश हो कि आतंक व अपराध से लड़ते उनके रक्षक पुलिसकर्मियों को ऐसे आरोपों का शिकार न होना पड़े … इस से भी पहले बिजनौर में सिपाही कमल शुक्ला, रामपुर में सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश, कन्नौज में सौरिख थाने सब इंसपेक्टर, कानपुर सजेती थाना के चौकी इंचार्ज बृजेश भार्गव, जौनपुर में थानेदार मिथलेश कुमार, फैज़ाबाद के इंस्पेक्टर राजीव सिंह आदि और अन्य तमाम पर ऐसे तमाम झूठे आरोप लगाए गए जिसमे सीधा निशाना रामराज्य की स्थापना के लिए अग्रसर योगी सरकार ही रही है और जांच उपरांत अनेक मामले राजनीति से प्रेरित पाए गए …

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