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नाराज इस बात से हो गये कि जुमे की नमाज़ से पहले क्यों गिरफ्तार किया ? कभी सुना है ऐसा नियम जिसे बनाया जा रहा खुद से ?

ऐसे खुद के बनाये नियम और कानून आप ने शायद ही पहले कभी सुने होंगे , क्या कानून अब मजहबी नियम और कायदों को देख कर कार्य करेगा या पुलिस को कार्यवाही से पहले किसी की ख़ुशी या समय देख कर कार्य करना होगा .. ये किस प्रकार के आरोप है पुलिस वालों के ऊपर कि किसी को जुमे की नमाज़ से पहले हिरासत में क्यों लिया ? फिलहाल जितनी चर्चा में ये बेहद हास्यास्पद आरोप हैं उतनी ही चर्चा में मुरादाबाद पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा भी .. 

ज्ञात हो कि ये मामला है पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का . यहाँ के शरीफ नगर के एक मदरसे में शौचालय की मरम्मत करते राजमिस्त्री को माहौल ख़राब होने की सम्भावना के चलते पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए हिरासत में लिया जिसके खिलाफ कुछ लोगों ने ये आरोप लगाया है कि उन्हें जुमे की नमाज से पहले क्यों हिरासत में लिया गया . इतना ही नहीं इस को मुद्दा बना कर कुछ लोग पुलिस के ऊपर भड़क गये और पुलिस के साथ साथ शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत कर्ता ने तमाम प्रमाणों और तथ्यों के साथ बताया है कि वो मदरसा ही अवैध है . 

लेकिन तमाम लोग इस के खिलाफ लामबंद हो गये हैं जो सीधे सीधे कानून को चुनौती देने जैसा है . शरीफ नगर में ताज मस्जिद से जुड़े मदरसे में शुक्रवार को राजमिस्त्री दूसरी मंजिल पर शौचालय की मरम्मत कर रहे थे। इस बीच पड़ोसी की शिकायत पर डायल 100 पुलिस राजमिस्त्री और मजदूर को उठा लाई। दोनों का बाद में शांतिभंग की धाराओं में चालान कर दिया क्योंकि उने उस स्थान के बारे में बेहतर ढंग से पता था और वहां चल रहे विवाद के बारे में भी लेकिन इसके बाद भी वो दोनों जिद पर अड़े थे . जुमे का दिन होने की वजह से मदरसा कमेटी के साथ ही नमाजी भी भड़क उठे,… जबकि आम जनता में पुलिस की निष्पक्ष कार्यवाही को ले कर ख़ुशी थी और पुलिस की न्यायप्रियता को ले कर लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को सराहा भी था लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग इसके विरोध में खड़े रहे . 

शुक्रवार रात मीटिंग के बाद शनिवार को मस्जिद मदरसे से जुड़े ग्राम प्रधान एम इल्यास, मस्जिद मदरसा कमेटी अध्यक्ष डॉ जहांगीर सैफी, प्रबंधक हाजी वसीम अहमद, इमाम मौलाना नजीबुल हक, हनीफ अहमद लवली, मुंशी यामीन अंसारी, हाजी फईम अहमद, अतीक अहमद, दानिश कलीम, असलम कलवा, तस्लीम अहमद अदि उपजिलाधिकारी रामजी लाल और कोतवाल मनोज कुमार से मिले उन्होंने सीधे सीधे प्रशासन को चेतावनी देने के अंदाज़ में बताया कि ऐसी कार्रवाई से गांव का माहौल बिगड़ सकता है। हैरानी की बात ये है कि उन्होंने शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया . 

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