सम्मेलन था अपनी मित्रता बढाने का , लेकिन शुरू हो गई तनातनी .. कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़ गए #Rajbabbar के ही आगे

देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी आज देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मृतप्राय हो चुकी है. राज्य में पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर तथा प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद कानपूर आये थे. इस कार्यक्रम को कार्यकर्ता सम्मलेन का नाम दिया गया था. कानपुर महानगर कांग्रेस पार्टी का शनिवार को हुआ ये कार्यकर्ता सम्मेलन एक तरह से ‘कार्यकर्ता भड़ास निकालो सम्मेलन बनकर रह गया क्योंकि इसमें कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ भड़ास निकाली. नगर निकाय चुनाव के दौरान टिकट वितरण और चुनाव में प्रत्याशियों से ज्यादा निर्दलियों का साथ देने वाले पार्टी के बड़े नेताओं पर कार्यकर्ताओं ने जमकर आग उगली.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंच पर बैठक पार्टी के स्थानीय बड़े नेताओं की तरफ उंगली दिखाकर, नाम लेकर चिल्लाते हुए कहा कि इनकी वजह से वह लोग चुनाव हार गए. कार्यकर्ताओं के इस गुस्से को वहां बैठे प्रदेश प्रभारी गुलाब नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर अवाक होकर सुनते रहे. कांग्रेस पार्टी ने अपने बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं का दिल जीतने के लिए, उनसे टच में रहने के लिए नई रणनीति के तहत काम करना शुरू किया है. इस बार का कार्यकर्ता सम्मेलन इसी रणनीति का एक हिस्सा था. इसके तहत सम्मेलन में एक भी बड़े नेता को बोलने का मौका नहीं दिया गया. सिर्फ कार्यकर्ताओं अपनी बात बेबाकी से रखने की योजना बनाई गई.

सिविल लाइंस स्थिति रागेंद्र स्वरूप आडीटोरियम में खचाखच भरे कार्यकर्ताओं के बीच पार्षद का चुनाव हार गए पार्टी कार्यकर्ताओं को सबसे पहले एक-एक करके बोलने के लिए बुलाया गया. इसके बाद मंडल अध्यक्षों की बात सुनी गई. इससे पहले जीते हुए पार्षद और मेयर की प्रत्याशी रहीं बंदना मिश्रा को भी बोलने का मौका दिया गया. सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ताओं में गर्मी और मंच पर बैठे स्थानीय बढ़े नेताओं में घबराहट उस समय शुरू हुई, जब हारे हुए पार्षद प्रत्याशियों बड़े नेताओं का नाम लेकर, चुनाव में इनकी तरफ से किए गए असहयोग की कहानी बयां करने लगे. पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश, पूर्व सांसद राजाराम पाल, पूर्व विधायक अजय कपूर, भूधर नारायण, संजीव दरियाबादी, पवन गुप्ता, आलोक मिश्रा सभी का नाम लेकर कार्यकर्ताओं ने अपनी भड़ास निकाली.
पार्षद का चुनाव हार गया एक कार्यकर्ता कौशिक रजत वाजपेयी तो अपनी बात कहते-कहते रोने लगा. उसने एक-एक करके सबका नाम ले लिया. आखिर में गुलाब नबी आजाद ने उसे अपने पास बुलाकर उसे आश्वासन दिया कि अगली बार उसके चुनाव में वह खुद प्रचार करने आएंगे. कार्यकर्ताओं ने राजबब्बर तथा गुलाम नबी आजाद से साफ़ कह दिया कि प्रदेश में पार्टी को कमजोर करने में कांग्रेस के सारे बड़े नेताओं की अहम् भूमिका है. निकाय चुनाव में पार्टी अच्छा कर सकती थी लेकिन सरे बड़े नेता या तो उस समय आराम कर रहे थे या निर्दलियों का/अन्य प्रत्याशियों का साथ दे रहे थे.

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