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रेलवे के अधिकारी ने आग्रह किया.. छोटी ख़बरों को बड़ी सनसनी न बनाएं समाचार माध्यम

आज भी कुछ मीडिया एजेंसी ऐसी भी है जो गलती करने वाले को दोषी न ठहरा कर वही इलज़ाम किसी निर्दोष पर थोप देती है और जनता को उसके पीछे सच्चाई का पता नहीं चल पता. लेकिन कुछ मीडिया ऐसी भी हैं जो सच्चाई का साथ देती है। कुछ मीडिया एजेंसी छोटे मामले को बढ़ा चढ़ा कर दिखाती हैं और हर वक्त कोशिश करती है योगी सरकार को टारगेट करना लेकिन जो बढे मामले होते हैं उन पर किसी की नज़र नहीं जाती। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश का सामने आया है जिसमे रेल पटरी में इंजन के दो पहिये एक प्राइवेट साइडिंग में उतर जाने जैसे छोटे मामले को ट्रैन पलटने का हादसा बता कर मामले को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जबकि सच्चाई कुछ और थी।

इस मामले में अपना आक्रोश जताते हुए उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल ने सच्चाई से आगाह कराया और कहा की मीडिया ने इस छोटे से मामले को बढ़ी घटना का नाम देव कर जनता के सामने पेश किया है जबकि यह सच नहीं। गौरव कृष्ण बंसल ने बताया कि एक इंजन के दो पहिये एक प्राइवेट साइडिंग में उतर गए जो रनिंग लाइन से एकदम अलग है तो इसमें कौन सा “बड़ा हादसा” होने वाला था जो टल गया ? क्या “हादसा” शब्द के बिना काम नहीं चलता ? इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि कानपुर में हुई इस घटना में मालगाड़ी नहीं गिरी है, एक अकेले इंजन के दो पहिये पटरी से उतरे हैं वो भी एक FCI की प्राइवेट साइडिंग में।

चंदारी स्टेशन से FCI की ये साइडिंग निकलती है। वहां लोडेड मालगाड़ी को प्लेस कर के इंजन बाहर आ रहा था।
इससे न तो कोई ‘बड़ा हादसा’ होने की आशंका थी।

गौरव कृष्ण बंसल ने मीडिया एजेंसी को दोषी ठहराते हुए कहा कि इस छोटे से मामले में हादसा शब्द का इस्तेमाल करने की कोई जरुरत नहीं थी अगर ट्रैन पटरी से बहार होती तो शायद इसे बढे हादसे का नाम दिया जा सकता था। गौरव कृष्ण बंसल ने यह भी कहा कि,” इससे न तो कोई ‘बड़ा हादसा’ होने की आशंका थी, ना ही कोई “बड़ा हादसा टला” है। 

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