रविशंकर की मध्यस्थता को योगी जी ने भी नकारा.. बोले अदालत को कम करने दें अपना

हर कोई अब इस बात से अच्छी तरह से अवगत है कि राम मंदिर विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट ही सुनाएगी लेकिन फिर भी लगता है कुछ लोगों को इंतज़ार नहीं हो रहा है। अभी हाली में ही रवि शंकर का इस अयोध्या विवाद पर कुछ लोगों के साथ समझौते की बात करने का प्रयास कर रहे है जिसे आज योगी जी ने ख़ारिज करते हुए कहा कि ,”उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 दिसंबर से रोजाना सुनवाई का फैसला ले लिया है और ऐसे में अदालत से बाहर बातचीत या मध्यस्थता के प्रयास न्यायालय के काम में बाधा ही डालेंगे।”

सभी पक्षों को इस वकत धैर्य रखने की जरुरत है और कोर्ट के न्याय पर भरोसा रखना चाहिए।

बता दें कि होटल ताज में एक चैनल के कार्यक्रम में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ,”श्री श्री उनसे लखनऊ आकर मिले थे और किसी मुद्दा विशेष पर उनसे बातचीत नहीं हुई। यह एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात थी।” बता दें कि राम मंदिर विवाद पर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया था। जब इतने वर्षों में किसी पक्ष ने बातचीत नहीं की तो इस वक्त जब कोर्ट का फैसला आने को ही है तब कोई बातचीत करने का तुक नहीं बैठता है।

योगी जी ने कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए कहा कि ,” श्री श्री रवि शंकर या समझौता का प्रयास कर रहे अन्य लोग इस मामले में अदालत में पक्षकार नहीं हैं, इसलिए उनसे बात नहीं बन सकती।

बातचीत तभी सार्थक परिणाम दे सकती है, जब इसके लिए पक्षकार तैयार हों।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ,’ अदालत में सरकार भी पार्टी नहीं है, इसलिए जो तय करना है, वो तीनों पक्षकार ही तय कर सकते हैं। मामला जब संवाद से हल न हो तो न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।’इसके साथ ही उन्होंने यूपी के नगर निकाय चुनाव के साथ-साथ हिमाचल और गुजरात के चुनावों में भी भाजपा को भारी बढ़त मिलने का दावा किया।

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