Breaking News:

“तू क्या सोच रहा थानेदार, मेरा गंदा ही सही पर धंधा बंद करवा कर तू आराम से रह लेगा ?” – कुछ ऐसी ही चुनौती दे कर गया था शकील श्रावस्ती पुलिस के थानेदार यशवंत को

आतंक और अपराध से लडती पुलिस जब आखिर फर्जी और आधारहीन आरोपों का भी सामना करना पड़ता है तो ये यकीनन पुलिस से ज्यादा उस समाज के लिए घातक होता है जिसकी रक्षा वो पुलिस वाला कर रहा होता है . शारीरिक रूप से घायल जवान कई बार अपने मोर्चे पर डटा रहता है लेकिन मानसिक रूप से चोटिल रक्षको के लिए मोर्चे पर डटे रहना किसी भी रूप से सम्भव नहीं हो पाता . .ज्ञात हो कि अवैध खनन उत्तर प्रदेश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी जिसको किसी भी हाल में रोकने के लिए शासन के निर्देश थे . उसी निर्देश पर चलते हुए जब कानून व्यवस्था के पेंच कसे गये तब से ऐसे कई मामले सामने आये हैं जब पुलिस वालों को फर्जी और आधारहीन आरोपों का शिकार बनाया गया है . अवैध खनन किस हद तक अपराध को पोषण देता है ये सहरानपुर की घटना से जाना जा सकता है जिसमे उन्मादी भीम आर्मी को फंडिंग देने में अवैध खनन में संलिप्त लोगों के नाम सामने आये थे और शासन व् प्रशासन को उसे कुचलने में काफी समस्या आई थी . 

फर्जी आरोपों की लाइन लगाए ये वो लोग हैं जो कभी कानून को ठीक से पालन करने में अपनी तौहीनी समझते थे लेकिन जब से प्रशासन ने उनको सही राह दिखाने की कोशिश की तो वो अपने असल रूप में आ गये और निशाने पर ले लिया प्रशासन को ही .उत्तर प्रदेश के योगीराज में जहाँ पुलिस बेहद चुस्त और दुरुस्त हो कर प्रशासनिक और कानूनी शासन को मजबूती के साथ पटरी पर लाना चाहती है वहीँ उसकी राह में तरह तरफ से रोड़े बिछाये जा रहे हैं . कहीं उसे पत्थरों का सामना करना पड़ रहा , कहीं उसे गोलियां झेलनी पड़ रही .. और अब इन सब बातों से पार पा जाए तो अंतिम हथियार के रूप में आधारहीन और नकली स्वरचित आरोप झेलने पर मजबूर किया जा रहा . इस मामले में नम्बर उस श्रावस्ती जिले का लगाया गया है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के गृह जनपद गोरखपुर के नजदीक ही है.. इन्ही सब के चलते ही वहां उन अधिकारियो को तैनात किया गया है जिन्हें किसी भी अनावश्यक दबाव और अवैध प्रभाव से झुकाया न जा सके . उन्हें में से एक हैं सिरसिया थाने के थानेदार श्री यशवंत चौधरी जी  .

एक नया मामला आया है उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले से. यहाँ पर सिरसिया थाना क्षेत्र के जोखवा बाजार के गाँव दुर्गापुर में एक ऐसा परिवार जो अवैध खनन में संलिप्त था और धरती को अवैध रूप से चीर कर उसकी कमाई से पूरे परिवार को चला रहा है . इसका मुखिया है शकील पुत्र वकील अहमद . ये इस से पहले दो बार पुलिस और खनन विभाग द्वारा अवैध खनन में रंगे हाथ पकड़े गए थे लेकिन मेहनत की कमाई इनके शायद खुद के सिद्धांत में नहीं थी . उन्होंने अवैध खनन जारी रखा, ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासन ने इन्हे पूरा मौका दिया था सुधरने का पर ये उस मौके को एक और अवसर समझ कर अनावश्यक लाभ उठाते रहे . 

एक बार फिर से इनको रंगे हाथ पकड़ा सिरसिया थाने की पुलिस ने. इन्होने अपने हर प्रभाव का इस्तेमाल किया अपने अपराध को दबाने का और स्थानीय पुलिस को दबाव में लेने का पर वो सब नाकाम रहा .. आखिरकार शकील के परिवार ने तब अपना आखिरी दांव खेला और उन पर घर की महिलाओं के साथ छेड़खानी का आरोप लगा दिया. इन सब आरोपों को लगाने के लिए अजबुन्निशा व् अनारकली नाम की महिलायें सामने आई. इतना ही नहीं उन्हें पैसे मांगने का भी आरोपी बनाने की कोशिश की जाने लगी जिसमे शकील के भाई शरीफ , जो केवल नाम के शरीफ हैं , सामने आये ..उनके अनुसार 29/8/2018 की रात्रि करीब 1 बजे थानाध्यक्ष अपने हमराहियों के साथ प्रार्थी शकील अहमद पुत्र वकील अहमद के घर में घुसकर नसीबुनिशा अपने घर मे सो रही थी तभी थानाध्यक्ष पहुंच कर घसीटते हुए मारने लगे आवाज होने पर उसकी 90 वर्षीय दादी उठ कर आई और पूछ ताछ करने लगी उनके पूछने पर उनको भी धक्का देकर गिरा दिया। उनकी भी आवाज करने पर उनकी बहन अजीबुन्निशा व उनकी माँ अनारकली भी आ गई औऱ उन्होंने पूछा साहब क्या गलती है क्यों मार रहे हो तब थानाध्यक्ष ने कहा कि चोर पालते हो और भद्दी भद्दी गालिया देने लगे। 

इस पूरे मामले में कुछ सवाल उठते हैं . क्या कोई व्यक्ति छेड़खानी करने पूरा पुलिस बल ले कर जाएगा ? क्या छेड़खानी किसी के पूरे परिवार के सामने होती है और वो भी एक प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी द्वारा ? अगर अवैध खनन करती ट्रैक्टर ट्राली बरामद कर लिया था पुलिस ने तो वो घर में छापेमारी क्यों करने जायेगी .. छेड़खानी करने की नियति वाला पैसे भी मांग रहा था ये शायद इतिहास में विरला मामला हो जो कहीं न कहीं इन आरोपों के पीछे छिपे सच को सामने लाता है ..थानेदार श्री यशवंत जी स्वय एक धार्मिक विचारधारा के पुलिस अधिकारी हैं जिनके पूरे जीवन काल जिसमे विभागीय और व्यक्तिगत दोनों शामिल हैं ,  में कभी भी किसी नारी के सम्मान को ठेस पहुंचने जैसा मामला सामने नहीं आया .. फिर भी उनके ऊपर ऐसे आरोप कहीं न कहीं न सिर्फ उन्हें बल्कि वर्दी में निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते तमाम पुलिसवालों के मनोबल पर असर डालता है .  एक तो महिला दूसरा अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक , होने के नाते इतना अतिविश्वास था की उसकी साजिश कामयाब हो जायेगी लेकिन न सिर्फ पुलिस वाले अपितु आम जनता भी इन आरोपों को ठीक से जानती है और आशा में है कि वही होगा जो न्यायोचित होगा ..

यहाँ ये जरूर ध्यान रखने योग्य है कि अगर कुछ आधारहीन और तथ्यहीन खबरों को सही न माना जाय और सटीक आंकड़ो पर ध्यान दिया जाय तो श्री यशवंत चौधरी जी की तैनाती के बाद सिरसिया थाने में अपराध का ग्राफ तेजी से गिरा है .. इतना ही नहीं न्याय के लिए आम जनता की आस भी जगी है क्योकि झूठे आरोपों को भी इस थाने में परख और पकड लिया जाने लगा जो अक्सर बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है .. और यही बदलाव कुछ लोगों को रास नहीं आया . इसके चलते ही थानाध्यक्ष श्री यशवंत चौधरी जी ने अभियुक्त शकील की तरफ से आ रहे तमाम दबाव और लालच आदि को ठुकराते हुए न्याय किया था .. ये न्याय अन्याय चाह रहे उन साजिशकर्ताओं को रास नहीं आया और उसने फिर झूठे आरोपों की बौछार शुरू हो गयी .. सुदर्शन न्यूज की जमीनी पड़ताल में ये समें आया है कि इस मामले में सिरसिया के वो तमाम अराजक तत्व एक हो गए हैं जिन्हे श्री यशवंत चौधरी जी के न्यायोचित कार्यों से इतनी दिक्कत थी कि उनके तमाम अवैध कार्य बंद हो गए थे .. इस पूरे मामले से पुलिस विभाग को अवैध कार्य करने वालों द्वारा एक चेतावनी देने की कोशिश भी है कि यदि उनके अनैतिक कार्यों में रुकावट डाली तो ऐसे ही आरोपों से उन्हें मानसिक प्रताड़ित किया जाएगा .. इसलिए थानेदार श्री यशवंत चौधरी को निशाने पर ले कर इस प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है जिस से वो अपराधियों के विरुद्ध की जा रही अपनी कठोर कार्यवाही से विचलित हो जाएँ . लेकिन तारीफ करनी होगी पुलिस बल की जो ऐसे तमाम आरोपों को झेलते हुए भी जनता की सुरक्षा दिन में भूखे रह कर और रातों में जाग कर कर रहा है .

यहाँ प्रसंशा की पात्र वो श्रावस्ती जिले के सिरसिया थाने की वो पुलिस है जो नारी के सम्मान के अपने दायित्यो को जानते हुए इस मामले में सब कुछ शीशे की तरफ साफ़ होने के बाद भी केवल अवैध खनन की कार्यवाही की न कि ऐसे झूठे मामलों पर कोई कानूनी कार्यवाही .. , असल में गहराई से पड़ताल करने पर सामने आता है कि इस पूरे मामले में सीधे निशाना योगी सरकार को बनाने की साजिश रची गयी है . आये दिन ऐसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिसमे शासन और प्रशासन के अधिकारियो को ऐसे कई झूठे और स्वरचित मामलो से न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है बल्कि उनके सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया गया है .. बिजनौर के सिपाही कमल शुक्ला , रामपुर के सब इंस्पेक्टर जय प्रकाश , मुरादाबाद चंदौसी के चौकी इंचार्ज हरपाल सिंह , शाहजहांपुर के सिपाही के , देवरिया में थानाध्यक्ष श्रवण यादव के बाद अब श्रावस्ती के सिरसिया थाने के थानेदार श्री यशवंत चौधरी जी पर इस प्रकार से आधारहीन आरोप व स्वरचित मिथ्या मामले रचने वालों पर कड़ी कार्यवाही न हुई तो निश्चित तौर पर ये समाज की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले, आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल के लिए किसी भी रूप में सार्थक परिणाम नहीं देगा और इसका असर जनता पर जरूर पड़ेगा .

Share This Post