वो इमाम था मस्जिद का जिससे आशा थी भाईचारे की लेकिन जब वेदप्रकाश की बेटी सफाई कर रही थी अपना ही घर तो……

कहते हैं कि धर्गुरु चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय के हों किसी भी समुदाय के हों समाज को मार्ग दिखाने वाले माने जाते हैं पथ प्रदर्शक माने जाते हैं. लेकिन उसके बाद भी कोई धर्म गुरु कोई मौलाना कोई इमाम मानवता को कलंकित करने का प्रयास करता है, अपनी बदनीयती का परिचय देते हुए किसी महिला की इज्जत पर हाथ डालता है तो क्या वो धर्म गुरु कहलाने लायक है या फिर वो इंसान के नाम पर कलंक है.

खबर के मुताबिक़ तीन दिन होली के त्यौहार पर मेरठ क्षेत्र के ढडरा गाँव के वेदप्रकाश की पुत्री अपने घर की साफ़ सफाई कर रही थी, उसने सफाई के बाद निकला हुआ कूड़ा पास की नाली में ही डाल दिया. उसी नाली के पास एक मस्जिद बनी हुई है. युवती के नाली में कूड़ा डालने के बाद मस्जिद का इमाम आरिफ जानी वेदप्रकाश की पुत्री के साथ दुर्व्यहार करने लगा था अपशब्दों का प्रयोग किया. उसके बाद इमाम ने युवती के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की.

युवती के शोर मचाने पर गाँव के लोग इकट्ठा हो गये तथा झगड़ा शुरू हो गया. युवती के साथ इमाम डरा हुए दुर्व्यहार के कारण आक्रोशित लोगों ने इमाम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. फिर इमाम की तरफ से लोग लाठी डंडे लेकर निकल आये जिसके बाद वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया. सूचना मिलने पर सरधना सीओ संतोष कुमार के नेतृत्व में तीन थानों की पुलिस वहां पहुँच गयी तथा समझकर मामला शांत करने की कोशिश की.

लेकिन इमाम जिसे वहां के लोग सम्मान की द्रष्टि से देखते थे, उस इमाम द्वारा एक बालिका के साथ इस तरह के असहनीय व्यवहार के करें वहां के हिन्दू समाज का आक्रोश शांत नहीं हुआ तथा उस इमाम को ग्रामीणों ने गाँव से बहार निकालने की मांग की. लाख समझाने के बाद भी हिन्दू समाज अपनी मांग पर अड़ा रहा था जिसके बाद सीओ संतोष कुमार ने भरोसा दिलाया कि इमाम को गाँव से बहार भेज दिया जायेगा उसके बाद ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ. जिसके बाद पुलिस ने इमाम को गाँव से बहार भेज दिया. कोई अनहोनी न हो जाये इसे देखते हुए गाँव में पुलिस तैनात कर दी गयी थी.

Share This Post

Leave a Reply