क्या होता है जब एक मुसलमान धर्मनिरपेक्षता की बातें करता है?? देखिये रिजवी का क्या हुआ

उनके लिए सिर्फ वही सही है जो वो कहती हैं. अगर उनके बीच का व्यक्ति भी राष्ट्र हित मानवता के हित में बात करता है तो उनके लिए वो हराम हो जाता है. अगर उनके ही बीच के किसी व्यक्ति ने सत्यता प्रकट कर दी जो उनकी मजहबी उन्मादी सोच के खिलाफ है तो उनके लिए वो व्यक्ति भी उनका दुश्मन हो जाता है उनके लिए हराम हो जाता है. उनकी इसी मजहबी उन्मादी सोच का शिकार अब उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी हुए हैं.

वसीम रिजवी अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाये जाने के लिए बयान देते रहते हैं. हाल में वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल  लॉ बोर्ड से देश की 9 मस्जिदों को हिन्दुओं को वापस लौटाने के लिए पत्र लिखा था जो कभी मन्दिर थे तथा जिन्हें तोडकर कब्जा करके मस्जिदें बनाई गयीं. अब इसीलिये इस्लामिक अकादमिक के निदेशक और दारूल उलूम के पूर्व छात्र मेहंदी हसन कासमी ने वसीम रिजवी के खिलाफ भडकाऊ भाषण देने, सांप्रदायिकता फैलाने, दंगा भड़काने जैसे संगीन आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर देकर कार्यवाही करने की मांग की है.

मेहंदी हसन कासमी ने देवबंद कोतवाली में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि वसीम रिजवी टीवी चैनलों और न्यूज एजेंसियों को पिछले दो -ढाई माह से ऐसे बयान और साक्षात्कार दे रहे हैं, जिससे देश में सांप्रदायिकता फैल सकती है. वह समुदाय विशेष पर अनर्गल आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का काम भी कर रहे हैं. उन्होंने वसीम रिजवी द्वारा अभी तक दिए गए बयानों की क्लीपिंग भी पुलिस को दी है. उन्होंने कहा है कि पिछले दिनों रिजवी ने 9 मस्जिदें हिन्दुओं को देने की मांग की जिससे माहौल खराब होने की सम्भावना है.

अपनी तहरीर में मेहंदी हसन कासमी ने कहा है कि अगर पुलिस ने रिजवी पर मुकदमा दर्ज नहीं किया, कार्यवाही नहीं की तो आगे भी रिजवी ऐसे बयान देते रहेंगे जिससे माहौल खराब हो सकता है. पुलिस का कहना है कि हम इस मामले की जांच कर रहे है और जांच करने पर यदि आवश्यक हुआ तो ही मुकदमा दर्ज किया जायेगा. इन सब बातों से एक ही बात स्पष्ट होती है कि मेंहदी हसन को वसीम रिजवी का सच बोलना स्वीकार नहीं हो रहा है और वह रिजवी को सच बोलने की सजा दिलवाना चाहते हैं. जब एक मुसलमान सच बोलता है धर्मनिरपेक्ष बातें करता है तब उसका ये हाल होता है जो रिजवी का हो रहा है. अब देखना ये है कि पुलिस इस पर क्या निर्णय लेती है.

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