मजबूर व्यक्ति ने मांगी दोपहिया की सहायता……..जाने क्यो

नई दिल्ली: एंबुलेस नहीं मिलने पर एक व्यक्ति का आरोप था कि उसके 15 वर्षीये पुत्र को एंबुलेंस की सुविधा नही दी गयी थी। और एक मामला ये भी है एक शख्स ने  अपनी पत्नी की डैड बाँडी  को कंधे पर रख कर घर तक ले जाने वाले दाना मांझी की कहानी ने  अस्पताल प्रशासन व्यवस्था पर बहुत से  सवाल खड़े हुऐ थे.  अब भी आपके मन मे कही ना कही ओडिशा के दानी मांझी की वो यादे आपकी आखों के सामने घुमती होगी। कि एक पति अपनी पत्नी की लाश को अपने कंधे पर उठाकर 10 किलोमीटर पैदल चल पड़ा था.ऐसी ही एक वारदात कर्नाटक मे देखने को मिली।

 विडियो बनाकर चैनल पर दिखाया……

ऐसा एक मामला कर्नाटक मे देखने को मिला। बताया जाता है कि  सफन राय नाम के एक व्यक्ति के पुत्र की मौत  हो गई है। रविवार को एक गाड़ी वाले ने सफन राय के  तीन वर्षीय पुत्र रहीम को गाड़ी ने रहीम को टक्कर मार दी,  तुरन्त बच्चे को अस्पताल ले जाया गया। जिसके बाद डाक्टरो ने उसको  मृत घोषित कर दिया.  अपने पुत्र  की लाश को घर तक ले जाने के लिए अपने एक दोस्त को बुलाकर  अपने पुत्र को बाइक पर ले जाने की बात अपने परिचित से कर रहा था। जब सफन अस्पातल के बाहर इंतजार कर रहे थे किसी ने फोन से उनका वीडियो बना लिया. यह वीडियो कर्नाटक के लोकल चैनल पर दिखाया गया.जैसे ही पुलिस को यह विडियो मिलते ही तुरन्त पुलिस वहाँ पहुचं गयी।

  पुलिस ने बताया….

.कहा जाता है कि सफन को यह नही पता था कि  बाडी  को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस दी जाती है और ना ही अस्पताल प्रबंधन ने इसके बारे में बताया. तभी वहा आयी पुलिस ने बताया कि  सफन असम के रहने वाले हैं, जो पलायन कर कर्नाटक में मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करते है। इसीलिए  वह कर्नाटक की भाषा नहीं जानते हैं।

.पुलिस ने अस्पताल पहुंच घटना को  दर्ज किया और बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्ट के बाद बच्चे के शव को बहुत अच्छे तरीके से सफेद कपड़े में लपेटा गया और सफन को सौंप दिया गया. इतना ही नहीं शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेस की भी सुविधा  कराई गई. 

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