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शफी द्वारा जलाई गयी दलित बालिका के परिवार संग आगे आये हिन्दू संगठन. रक्तदान से ले कर पैसे तक की हर मदद की पेशकश .गायब हैं दलितों के तथाकथित पैरोकार


अचानक ही दलित हितो के शोर थम गए है और वो सभी एक एक कर के गायब हो गए हैं जो दलितों के सम्मान के लिए सत्ता तक को चुनौती दे दिया करते हैं  . आजमगढ़ में जो हुआ है वो किसी के भी रोंगटे खड़ा कर देने वाला है जहाँ एक दलित बच्ची का पीछा तब से किया जा रहा था जब उसने होश भी नहीं संभाला था . पीछा करने वाला शफी था जिसकी शिकायत पहले भी इस बालिका ने की लेकिन उस समय एक भी दलित हित चिंतक इस बच्ची की मदद करने नहीं आया ..

आखिकरकार इस बच्ची को उसके घर में घुस कर शफी ने जिन्दा जला दिया जिसका 95 प्रतिशत शरीर जल कर राख हो गया है और अंतिम साँसे चलने लगी हैं उसकी . समाचार लिखे जाने तक एक भी दलित शुभ चिंतक इस मामले पर एक भी शब्द बोलने से परहेज कर रहा है और दलित बस्ती अपनी लड़ाई अकेले लड़ रही थी जिसमे उन्होंने बच्ची को जला कर भाग रहे शफी को पकड़ कर बुरी तरह से मारा है.. इसके साथ ही इलाके में भारी तनाव फ़ैल गया है जिसमे दलित बच्ची की चीखें अब अस्पताल में गूँज रही है और उसके अलावा उसके परिजनों और शुभचिंतको की न्याय की मांग उनके गाँव में ..

यह मामला निजामाबाद थाना क्षेत्र के फरीहा गांव का है. परिजनों ने बताया कि आरोपी युवक लंबे समय से उसकी बेटी को परेशान कर रहा था. वह बार-बार फोन नंबर के लिए दबाव बना रहा था. घटना वाले दिन वह उसके घर में घुस गया और नंबर लेने के लिए उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा. नाबालिग ने जब छेड़छाड़ का विरोध किया तो उसने तेल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया. लड़की आग की लपटों से घि‍री हुई घर से बाहर निकली. परिजनों के चीखने पर आसपास के लोग दौड़े और वहां से भागने की कोशिश कर रहे शफी को दबोच लिया और उसकी बुरी तरह से पिटाई कर दी.

ताजा समाचार मिलने तक अब तक सिर्फ हिन्दू संगठन ही इस बालिका और उसके परिवार की मदद के लिए आगे आये हैं . हिन्दू संगठनों ने एक स्वर में पीड़ित दलित परिवार की लड़ाई तब तक लड़ने का फैसला किया है जब तक शफी फांसी के फंदे पर नहीं चढ़ जाता है और इतना ही नहीं , उस दलित बस्ती में घुस कर आये दिन ऐसे कुकृत्य करने वालों को जब तक एक एक कर के दमन नहीं कर लिया जाता .. इसके साथ अब तक हिन्दू सगठन जिसमे विश्व हिन्दू परिषद् , बजरंग दल और हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता है , उन्होंने पीड़िता के लिए रक्तदान और पीड़िता के परिवार के लिए हर प्रकार की मदद जिसमे आर्थिक सहयोग भी शामिल है , देने की पेशकश की है . पीड़िता के परिजन भी हैरान हैं ये देख कर की जो चुनावों में उनको अपने वोटो का एकछत्र मालिक समझते थे , वो गायब हैं और वो उनकी मदद के लिए आगे आये हैं जिनके बारे में उन्हें अब तक केवल दुर्भावना से भरा गया था . 


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