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ये किसके हवाले गौ-माता? जानें, पुरानी सरकारों में किस तरह की जाती थी गायों की देखभाल

लखनऊ : जहां एक और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आवास में गायों को रखते हैं। वहीं, राज्य की पुरानी सरकारों में गायों को किस तरह से रखा जाता था ये हम आपको बताते हैं। उत्तर प्रदेश शासन के पशुपालन विभाग द्वारा एक गौशाला पर दस लाख रुपए प्रति माह खर्च होने के बाबजूद गाये घुट-घुट कर मरने को मजबूर हैं जिसका जीता जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के तहसील मोहम्मदी के बरबर नगर पंचायत में स्थित राजकीय गौशाला है।

इसकी दशा जर्जर है इस गौशाला का निर्माण सन् 1960 में किया गया था, उस समय गायों के पानी के लिए समर सेविल और चारे की भी व्यवस्था थी। लेकिन आज वहां पर न ही समर सेविल है और न ही गायों के चारे की व्यवस्था है। इसके साथ ही आवासीय बिल्डिंग जर्जर है वहां की गायों को पानी इंडिया मार्का हैंडपंप से पिलाया जाता है। इस गौशाला का संचालन पशुपालन विभाग द्वारा किया जा रहा है।

गायों के बीमार होने पर उनका इलाज पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुमन द्वारा किया जाता है। इस समय गौशाला में तीन कर्मचारी तैनात हैं- सुरेश पाल मास्टर प्लेयर, अनिल कुमार मास्टर प्लेयर, महेंद्र कुमार कामदार। लेकिन कोई भी कर्मचारी वहां नहीं रहता है। इन सब का वेतन लगभग पचास हजार रूपये पर व्यक्ति है। जब इन लोगों से पूछा गया कि आप लोग यहां क्यों नहीं रहते हो, तो उन्होंने आवासीय बिल्डिंग के जर्जर होने का बहाना बनाते हुए टाल दिया।

जबकि सच्चाई ये है कि इस गौशाला का कोई भी कर्मचारी आज तक यहां रहा ही नहीं है, जिसके चलते आवासीय भवन साफ सफाई न होने के कारण जर्जर हो गये। गौशाला में जनरेटर तो है लेकिन खराब है बिजली भी नहीं है। मौजूदा समय में गौशाला में 26 गायें हैं। 2004 में बीजेपी नेताओं ने गौशाला में गायों को खराब चारा और पानी को लेकर विरोध भी हुआ, लेकिन तब की सरकार ने बीजेपी नेताओं पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी गौशाला की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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