फिर सामने आया कफील का काला रूप.. सिर्फ बच्चों की मौत नहीं, इस मामले में भी आरोपी निकला परिवार

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूम बच्चों के हत्यारे डॉक्टर कफील इस समय जमानत पर जेल से बाहर है तथा जिस दिन से वह बहार आये हैं उसी दिन से इशारों में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमलावर हैं. पिछले दिनों ही कफील के भाई पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था जिसके बाद से ही वह लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि करके उत्तर प्रदेश शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा करके सहानुभूति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके ऊपर से बच्चों की ह्त्या का दाग मिट सके.

लेकिन मासूमों के हत्यारे कफील का काला रूप यहीं ख़त्म नहीं होता है बल्कि उनके परिवार के काले कारनामे इससे भी आगे हैं. खबर के मुताबिक़, अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों के मौत मामले में आरोपी डॉक्टर कफील खान के भाई अदील और एक अन्य के खिलाफ पुलिस ने जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है. दरअसल, आरोप है कि अदील और फैजान ने साल 2009 में यूनियन बैंक में फर्जी खाता खुलवाया था. यह खाता फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए खोला गया था. सीओ कोतवाली की जांच में मामला सही पाया गया. जिसके बाद एसएसपी के आदेश पर अदील और फैजान पर कैंट थाने में केस दर्ज कर पुलिस तफ्तीश में जुट गई है.

इसमें भी सबसे आश्चर्य की बात ये है कि जब कफील के जालसाज भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया तो उससे पहली ही अदील ने सोमवार को ही मीडिया में एक पत्र जारी कर फर्जी मुक़दमे में फंसाए जाने की आशंका व्यक्त की थी. उन्होंने पत्र में पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि भाई काशिफ को गोली मारे जाने के मामले में उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर पुलिस उन्हें, उनके दो भाई डॉ कफील और काशिफ को फर्जी मुकदमें फंसाने की साजिश कर रही है. अदील ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा था कि उनके और भाईयों के खिलाफ कैंट या कोतवाली गोरखपुर में फर्जी मुकदमा दर्ज हो सकता है. परिवार का आरोप है कि सत्ताधारी नेताओं के शह पर फर्जी मुकदमे में फंसाया जा रहा है. यानी कि उनको अंदाजा हो गया था कि पूर्ववर्ती सरकारों में उसने जिन काले कारनामों को अंजाम दिया है, योगी सरकार उसकी तह तक पहुँच गई है और उन पर शिकंजा कसना तय है.

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