जिस अलीगढ़ में 250 रोहिंग्या बसाए गये थे अब वहां है 500 से भी ज्यादा..संक्रमित हो रहा राष्ट्र का माहौल..

बौद्धों तथा हिन्दुओं के हत्यारे रोहिंग्या आक्रांता देश को किस कदर संक्रमित कर रहे हैं इसकी बानगी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में देखने को मिली है जहाँ आश्चर्यजनक रूप  से रोहिंग्याओं की आबादी में बढ़ोत्तरी हुई है, इसके बाद अलीगढ़ पर भी केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की नजर टिक गई है. हालांकि अलीगढ़ में रोहिंग्याओं का मुद्दा गुजरे कई सालों से उठ रहा है, मगर इनकी संख्या को लेकर तस्वीर आज तक साफ नहीं हो सकी है.

खुफिया आंकड़ों पर गौर करें तो अलीगढ़ शहर में 250 रोहिंग्या वर्क परमिट या शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं, मगर वर्तमान मौके पर इनकी संख्या 500 के आसपास देखी जा सकती है. इसके बाद ये भी आशंका ये भी जताई जा रही है कि रोहिंग्याओं के बीच काफी संख्या में बांग्लादेशी भी रोहिंग्या बनकर रह रहे हैं. ऐसे में जरूरी हो गया है कि अलीगढ़ में रहने वाले इन शरणार्थियों और घुसपैठियों का नए सिरे से सत्यापन हो. जिस पर मंगलवार दोपहर से ही केंद्रीय व स्थानीय खुफिया एजेेंसियों ने काम शुरू कर दिया है. अलीगढ़ में 2010-12 के आसपास रोहिंग्या परिवारों का आना उस समय शुरू हुआ, जब यहां मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री की जड़ जमना शुरू हुई.  धीरे-धीरे मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के हब कहे जाने वाले मकदूम नगर में इन्हें ठिकाना मिलने लगा और स्थानीय लोगों ने इन्हें अपने घरों में किराये पर रखना शुरू कर दिया. अब तक मकदूम नगर में तकरीबन 300 से 400 लोग बस गए. इसी तरह करीब एक-एक दर्जन परिवार भुजपुरा व शाहजमाल में भी हैं लेकिन चिंता की बात ये है कि इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.

मुद्दा सुर्खियों में आने के बाद सुबह से ही केंद्रीय व स्थानीय खुफिया एजेंसियों ने स्थानीय अपडेट लेना शुरू कर दिया है.  नए सिरे से शरणार्थियों के रिकॉर्ड और उनके कार्ड का सत्यापन शुरू किया जा रहा है. अलीगढ़ एसएसपी अजय कुमार साहनी का इसे लेकर कहना है कि अलीगढ़ शहर में करीब 250 रोहिंग्या शरणार्थी हैं. उनका पूरा रिकॉर्ड हमारे पास है. लेकिन जानकारी मिली है कि इनकी संख्या बड़ी है तो अब उनके शरणार्थी कार्ड नए सिरे से सत्यापित कराए जाएंगे. उनकी समयावधि, गतिविधि और आने-जाने की तारीखों आदि का रिकॉर्ड नए सिरे से अपडेट किया जाएगा, इसके बाद ही कोई एक्शन लिया जाएगा.

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