मस्जिद से निकाल दिया गया वो मुस्लिम कांवड़िया, जिसने महादेव को चढ़ाया जल.. जनता पूंछ रही सवाल- कहाँ है धर्मनिरपेक्षता ?


पावन श्रावण मास चल रहा है तथा हर तरफ बम भोले तथा हर हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. हर कोई भोले की भक्ति में लीन नजर आ रहा है लेकिन तभी धर्मनिरपेक्षता को चुनौती मिली है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के कुछ मजहबी कट्टरपंथियों द्वारा जिन्होंने एक मुस्लिम युवक का बहिष्कार कर दिया है तथा मारपीट कर मस्जिद से भगा दिया तथा नमाज नहीं पढने दी. कारण सिर्फ इतना है कि ये मुस्लिम व्यक्ति हरिद्वार से कांवड़ लेकर आया था तथा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया था.

मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का है. खबर के मुताबिक़, बागपत के वीओ-बिनौली थाना क्षेत्र के रंछाड़ गांव का रहने वाला बाबू खान पुत्र अल्लाह मेहर हरिद्वार से कांवड़ लेकर आया था. बाबू खान ने बताया कि बताया कि गत तीन वर्षों से उसे शिव भोले की याद आती थी और शिव की पूजा भी करता था. इसी के साथ-साथ अपने धार्मिक कार्यों को भी करता था और नमाज भी अदा करता था. लेकिन इस बार वह कांवड़ लेने गया था तो रास्ते में कई स्थानों पर हिंदू समाज के लोगों ने उसका स्वागत किया और शहांजहांपुर गांव में उसे गीता भेंट की गई. उसके बाद शिवरात्रि पर पुरा महादेव मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. वह अपने गांव में पहुंचा और दो मंदिरों में भगवान भोलेनाथ पर गंगाजल चढ़ाया. उसकी इस पहल का हिंदू समाज के लोगों ने उसका स्वागत व सम्मान किया.

बाबू खान के अनुसार शुक्रवार की दोपहर वह गांव की मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने पहुंचा तो वहां मौजूद गांव के ही मुस्लिम युवकों ने उसके गाली गलौच की और हाथापाई करते हुए उसे मस्जिद से धक्के देकर बाहर निकाल दिया। आरोपियों ने उसे नसीहत देते हुए कहा कि ‘जा अब मंदिर में घंटे बजा और कीर्तन कर, यहां तुझे नमाज अदा नहीं करने देंगे, चूंकि तू नापाक हो गया है तथा इसकी शिकायत किसी से भी कर ले. बाबू खान ने बताया कि इसके बाद रात के समय उसके घर पर मुस्लिम लोग पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए उसके ऊपर हमला कर दिया, उसने किसी तरह जान बचाई. दहशत के मारे उसके बच्चे और पत्नी अपनी रिश्तेदारी में चले गए हैं. गांव के लोगों को जैसे ही इस बात का पता लगा कि बाबू खान को कांवड लाने पर मस्जिद में नमाज अदा नहीं करने दी तो हिंदू समाज के लोगों में आक्रोश उत्पन्न हो गया. बाबू खान के मकान पर काफी लोग एकत्र हो गए औरजुलूस के साथ हिंदुस्तान जिंदाबाद तथा बम बम भोले के जयकारे भी लगाए.

बाबू खान ने कहा कि यदि इसी तरह से उसके समाज के लोग उसे प्रताड़ित करेंगे तो वह धर्म परिर्वतन करने को मजबूर होगा. उसने इस संबंध में बिनौली थाने पर पहुंचकर चार युवकों के खिलाफ तहरीर दी है. पुलिस ने तहरीर लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है. बिनौली थानाध्यक्ष देवेन्द्र बिष्ट का कहना था कि बाबू ने इस संबंध में चार युवकों के खिलाफ तहरीर दी है, इस पर गंभीरता से जांच की जा रही है और कार्रवाई होगी. लेकिन यहाँ सवाल खड़ा होता है कि आखिर वो धर्मनिरपेक्षता कहा है जिसकी दलीलें हमारे राजनेता तथा तथाकथित बुद्धिजीवी देते हैं. एकतरफ धर्मनिरपेक्षता की बड़ी बड़ी बातें लेकिन दुसरी तरफ अगर मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति कांवड़ ले आया तो उसका सामाजिक बशिष्कार ये कहकर कर दिया जाता है कि चूँकि वह शिवमंदिर गया, शिवाभिषेक किया तो नापाक हो गया. आखिर ये कौन सी धर्मनिरपेक्षता जो मंदिर जाने से किसी को नापाक कर देती है लेकिन इफ्तार पार्टी, मस्जिद में जाने से बरकरार रहती है?


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