एक ऐसी तीन तलाक पीड़िता जिसे सिर्फ ससुराल वालों ने नहीं बल्कि ठुकरा दिया उसके मायके वालों ने भी .. कोई नहीं बता रहा कि वो जाए कहाँ ?

नारी स्वाभिमान के नाम पर बड़े-२ आंदोलन करने वाले तथाकथित ठेकेदारों की जुबान उस समय बंद हो गई जब एक तीन तलाक पीड़िता जिसे पहले उसके ससुराल फिर उसके मायके वालों ने भी ठुकरा दिया, उनके पास न्याय मांगने पहुँची. तीन तलाक की इस पीड़िता के लिए ससुराल के दरवाजे पहले ही बंद हो चुके थे. अब मायके वालों ने भी उससे मुंह फेर लिया है. वह अब थाने के चक्कर काटते रही है. वह पुलिस से गुहार लगा रही है कि उसकी मदद की जाए लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि नार५ी स्वाभिमान की तथाकथित लड़ाई लड़ने वाले इस पर मौन हैं.     

मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र का है. खबर के मुताबिक़, अजीमनगर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता को कुछ माह पहले उसके पति ने तीन तलाक दे दिया था. इसके बाद वह मायके चली गई थी. विवाद होने पर पंचायत बुलाई गई. जिसमें हुए फैसले के आधार पर उसका पति उसको फिर से अपनाने को तैयार हो गया था. लेकिन इसके लिए इद्दत की शर्त रखी गई थी. पीड़िता इद्दत में चली गई थी. फिर पंचायत हुई तो हलाला की शर्त रखी गई. पीड़िता ने हलाला भी कराया लेकिन उसके बाद भी पति निकाह को तैयार न हुआ. जिस पर फिर पंचायत हुई और पति को अपना वादा निभाने का फैसला सुनाया. यहां वह निकाह के लिए तैयार हो गया था. लेकिन इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई. पता चला कि जिसके साथ पीड़िता का हलाला कराया गया है उसका बच्चा उसके पेट में है.
इसके बाद उसके शौहर तथा उसके सुसराल वालों ने साफ मना कर दिया कि वह उसे नहीं अपना सकते हैं. जब वह अपने मायके वापस गई तो मायके वालों ने उसे घर में ही न घुसने दिया. ससुराल के दरवाजे उसके लिए बंद हो ही चुके थे. अब मायके ने भी उससे किनारा कर लिया है. पीड़िता ने पुलिस के सामने गुहार लगाई है कि वह ससुराल जाना चाहती है लेकिन ससुराल वाले उसे रखने को तैयार नहीं हैं. उसका पति अभी कहीं बाहर चला गया है तथा पीड़िता दर दर की ठोकरें खा रही है.

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