प्रिंस का नाम देखते ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तन गयी भौहें… फिर हुआ ऐसा अन्याय कि उसे जाना पड़ा हाईकोर्ट

पिछले दिनों जिन्ना की तस्वीर को लेकर बेहद चर्चा में रहे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. खबर के मुताबिक़, AMU से वित्तपोषित एबीके हाईस्कूल में कक्षा एक में प्रवेश परीक्षा में सफल छात्र को छह सदस्यों की टीम ने साक्षात्कार के बाद मनमाने ढंग से  इसलिए फेल कर दिया क्योंकि उसका नाम प्रिंस था. इसके बाद छात्र के परिजनों को न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ा. इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र की याचिका को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक छोटे बच्चे को कक्षा एक में प्रवेश देने के लिए शैक्षिक योग्यता की परीक्षा लेने व साक्षात्कार में 40 फीसदी अंक की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे ऐसे मामले की सुनवाई कर मनमानी पर अंकुश लगाने का क्षेत्राधिकार नहीं है, इसलिए कोर्ट स्वत: याचिका को जनहित याचिका में बदलते हुए जनहित याचिका की सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष दो हफ्ते में पेश करने का आदेश दे रही है. यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने छात्र प्रिंस के पिता विजय सिंह की याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह व प्रमेंद्र प्रताप सिंह ने बहस की. याची का कहना है कि उसके पुत्र ने कक्षा एक में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उसे छह अध्यापकों के पैनल के समक्ष साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. हर सदस्य ने एक सवाल पूछा. उसने सही जवाब दिया, किंतु जब परिणाम घोषित हुआ तो उसे फेल दिखाया गया.

छात्र के पिता ने कहा कि साक्षात्कार में केवल आठ अंक दिए गए.  नियम यह है कि 100 अंक की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थी को 25 अंक के साक्षात्कार का 40 फीसदी अंक पाना अनिवार्य है. मनमाने तौर पर कम अंक देकर फेल कर दिया गया. AMU से आरटीआइ में कारण पूछा गया तो कोई जवाब नहीं आया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि साक्षात्कार लिखित परीक्षा के अंक से 15 फीसदी से नहीं होगा और साक्षात्कार में 33 फीसदी अंक देना अनिवार्य है. विश्वविद्यालय ने इस आदेश का खुला उल्लंघन किया है. कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ऐसी मनमानी की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने कहा कि AMU को छात्रों को प्रवेश ददते समय भेदभावपूर्ण मनमाना रवैया न अपनाए.

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