एक मंदिर जिसमें गूँज उठी गोलियों की आवाज… जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक घायल तड़प रहे थे जमीन पर

संगम नगरी इलाहाबाद का एक मंदिर अचानक से गोलियों की तड़तड़ाहट से गूँज उठा. जिस मंदिर में थोद्दी देर पहले तक भक्तों का जमावाड़ा था, अचानक वहां से गोलियों की आवाज गूंजने लगी. जब तक स्थानीय लोग कुछ समझते तथा मंदिर पहुँचते तब तक दो लोग घायल जमीन पर तड़प रहे थे तथा फिर दोनों ने दम तोड़ दिया. सूचना पर पुलिस पहुँची तो देखा कि मंदिर के एक कोने वाले हिस्से में युवक और युवती का क्षत-विक्षत शव पड़ा था. युवक का तो भेजा ही उड़ गया था. युवती को भी सिर में ही गोली मारी गई थी.  दोनों के शव से पंद्रह फीट दूर तक मांस के लोथड़े पड़े रहे. युवक और युवती का क्षत-विक्षत शव देख लोगों का कलेजा मुंह को आ गया.  युवक-युवती के मौत की खबर जंगल में आग की तरह फैली तो मौके पर झूंसी समेत आसपास के देहात के लोग मौके पर जुटने लगे.

न्यायनगर कालोनी स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी विकास मिश्र ने बताया कि मंदिर भोर में चार बजे खुलता है. आरती के बाद भक्तों के लिए दोपहर बारह बजे तक मंदिर का मुख्य गेट खुला रहता है.  इसके बाद शाम चार बजे मंदिर का छोटा गेट खोला जाता है. अचानक से मंदिर से गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज सुनाई द्दी जाकर देखा तो युवक का तो भेजा ही उड़ गया था जबकि युवती के सिर का एक हिस्सा भी उड़ गया था. मांस के लोथड़े दोनों के शव से तकरीबन पंद्रह फीट दूर तक फैले रहे.  एक के बाद एक कई राउंड गोलियों के चलने से आसपास के लोग तो दहल गए. बेटी की हत्या से युवती वंशिका सोनी की मां उर्मिला बदहवास थी तथा बेटी के क्षत-विक्षत शव को देखकर वह बेहोश हो जा रही थी. कांपती हुई जुबान से बोली कि जब मैं मंदिर के भीतर गई तो युवक पहले से वहां मौजूद था. वह मंदिर परिसर के भीतर घूम रहा था. इसी बीच मेरी ननद का मुंबई से फोन आ गया.  मैं बात करने लगी. तभी युवक ने बेटी से विवाद करने के बाद अचानक गोलियां चलाना शुरू कर दिया.

घटना के वक्त मंदिर परिसर के भीतर मौजूद बुजुर्ग पंप आपरेटर रामप्रसाद से उसने गुहार लगाई कि दादा मेरी बेटी को बचा लो नहीं तो वह लड़का मार डालेगा. तभी मैं बाहर की ओर लोगों को बुलाने के लिए भागी. कुछ देर बाद लौटकर मंदिर के भीतर गई तो मेरी बेटी की हत्या कर युवक ने खुद को भी गोली से उड़ा दिया था. इतने कहते-कहते मां उर्मिला बदहवास होकर वहीं गिर पड़ी.  किसी तरह लोगों ने उसे पकड़कर सहारा दिया और पास में उसके रिश्तेदार के घर ले गए. न्यायनगर कालोनी के दुर्गा मंदिर परिसर में नलकूप भी है.  घटना के वक्त तकरीबन 70 वर्षीय बुजुर्ग पंप आपरेटर रामप्रसाद भी वहां मौजूद था. आंखों के सामने एक के बाद एक कई गोलियों के चलने और युवक-युवती का क्षत-विक्षत शव देख वह सदमे में था. उसने कहा कि जब तक वह कुछ समझता तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी.

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