बाराबंकी पुलिस के हाथों मुठभेड़ में मरे दुर्दांत इब्राहिम और मुशीर की लाश जब लेने कोई नही आया तो वहीं की एक मस्जिद से निकला अतीकुर्रहमान

अचानक नेताओं ने फिर से एक स्वर में चिल्लाना शुरू कर दिया कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता .. नेताओं की इस आवाज के पीछे चल रहा था 2 दुर्दांत और कुख्यात अपराधियों का पूरे इस्लामिक रीति रिवाज से अंतिम संस्कार  जिसे करवाया जा रहा था वही की मस्जिद में रहने वाले इस इस्लामिक मज़हबी व्यक्ति द्वारा ..यद्द्पि ये इस्लामिक रीति रिवाज से मुठभेड में मरे अपराधियो का अंतिम संस्कार करवाता व्यक्ति भी बोल रहा है कि आतंक का कोई भी धर्म नहीं होता .. भले ही नेता या कोई अन्य कुछ भी बोले लेकिन जनता सच को जान चुकी है और वो सब कुछ करीब से देख और समझ रही है ..

विदित हो कि पूरे परिवार का कत्ल कर के फिर घर मे लूट पाट के लिए कुख्यात कहे जाने वाले बावरिया गैंग के बाराबंकी पुलिस के हाथों मुठभेड़ मे मारे गए दो दुर्दांत अपराधियों के परिवारीजन दूसरे दिन भी उनकी लाश लेने नहीं पहुंचे। जिसके चलते पुलिस ने रविवार को दो डॉक्टरों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम कराया है। इसके बाद इस्लाम के नाम पर इन दोनों लावारिस शव का अंतिम संस्कार कराने वाले शहर के एक व्यक्ति ने दोनों दुर्दांत अपराधियों के शव का अंतिम संस्कार कराया।

मालूम हो कि रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत मरकामऊ-चौकाघाट रोड पर स्थित कटका का पुल किनारे छह जुलाई की रात पुलिस ने मुठभेड़ में बावरिया गिरोह के दो सदस्यों को मार गिराया था। जबकि उनके चार साथी भाग निकले थे। मृतकों में कानपुर जिले के बिल्हौर थाना क्षेत्र के मकनपुर नई ईदगाह निवासी मुशीर पुत्र अहमद और उन्नाव जिले के पारा थाना क्षेत्र अंतर्गत मौरावां निवासी इमरान उर्फ इब्राहिम पुत्र रजी शामिल थे। इनकी मौत की सूचना पुलिस ने जेल में बंद परिवारीजन को भी सूचना भेजवा दी थी। खानाबदोश होने के कारण उनके परिवार को अन्य कोई सदस्य नहीं मिला। जिसके कारण पुलिस ने शनिवार को शव का पोस्टमॉर्टम रुकवा दिया था कि हो सकता है कि सूचना पाकर उनके परिवारीजन आ जाएं। रविवार शाम तक परिवारीजन के ना आने पर पुलिस ने दो डॉक्टरों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम कराया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एसओ सफदरगंज पीके ¨सह की वहां डयूटी लगाई गई थी।

इब्राहिम को दो गोली लगने की पुष्टि हुई है। इब्राहिम के एक गोली पैर में व दूसरी सिर में लगी थी। वहीं मुशीर के केवल सिर पर ही गोली लगी थी। तीनों गोलियां दोनों के शरीर को पाकर करते हुए निकल गई थीं। पोस्टमॉर्टम के बाद रेलवे स्टेशन पर स्थित मस्जिद निवासी अतिकुर्रहमान दोनों शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। परिजनों के न आने से अतीकुर्रहमान आये और उन्होंने बताया कि दोनों शव का अंतिम संस्कार पूरे इस्लामिक रीति रिवाज से करा दिया गया है।

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