“DM साहब, हम काटेंगे तो बड़ा वाला जानवर ही, छोटे जानवर नहीं”… इतना बोला और खड़ा कर दिया विवाद

एकतरफ योगी सरकार यूपी में बकरीद के मौके पर गोवंश की कुर्बानी नहीं करने की सख्त हिदायत दे चुकी थी लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग मजहबी त्यौहार बकरीद की आड़ में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए तमाम नापाक प्रयास कर रहे थे. इसकी बानगी उत्तर प्रदेश के बिजनौर में देखने को मिली जहां कुछ उन्मादी लोगों ने एलान कर दिया कि वह बकरीद पर बकरे के साथ ही बड़े जानवर की कुर्बानी देंगे. बड़े जानवर से उनका तात्पर्य गोवंश से था. लेकिन जब प्रशासन ने इनकी अनुमति नहीं दी तो उन्मादी इस बात पर अड़ गये कि +वह ईद तभी मनाएंगे जब बड्डे जानवर की कुर्बानी देंगे. इसके बाद पैदा हुए तनाव को देखते हुए क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर के शिवालाकला थाना क्षेत्र का है. खबर के मुताबिक, बकरीद के मौके पर जब प्रशासन ने बड़े जानवर की कुर्बानी पर रोक लगा दी तो इससे मुस्लिम समुदाय के लोग विफर गये तथा हंगामा करने लगे. बड़े जानवर की मस्जिद में न जाकर और ईद की नमाज़ न पढ़कर अपना विरोध जताया. लोगों ने जिला प्रशासन को दूसरे पक्ष के लोगों के साथ हमसाज़ होने का आरोप लगाया. वहीं पुलिस का कहना है कि कुर्बानी पर रोक नहीं है, बस जिला प्रशासन से किसी भी नई परंपरा के शुरू करने की अनुमति नहीं है. बकरे की कुर्बानी की जा सकती है लेकिन बड्डे जानवर की कुर्बानी नहीं होने दी जायेगी. स्थिति को तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी ने क्षेत्र में भारी फोर्स को तैनात किया है.

मुस्लिम समुदाय का आरोप था कि दूसरे पक्ष के लोगों ने बड़े जानवरों की कुर्बानी पर रोक लगा दी. पुलिस भी उनका साथ नहीं दे रही है. मुस्लिम समाज का कहना है कि पिछले 50 सालों से बकरीद के मौके पर यहां का मुस्लिम बड़े और छोटे दोनों तरह के जानवरों की कुर्बानी देता आ रहे हैं. धर मामले में चांदपुर सीओ ने बताया कि कुर्बानी पर कोई रोक नहीं है. जिला प्रशासन द्वारा कोई भी नई परम्परा शुरू करने के आदेश नहीं दिये जायेंगे. हल्के तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए क्षेत्र में पीएसी और अन्य पुलिस बल सहित फोर्स को तैनात किया गया. 

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